Mood kya hai Agra: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं. प्रदेश की चर्चित सीटों में शामिल आगरा जिले की सभी 9 विधानसभा सीटों पर 2017 और 2022 के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने परचम लहराया था. लेकिन 2027 के महासमर से पहले 'दलितों की राजधानी' कहे जाने वाले आगरा का सियासी मूड क्या है? स्थानीय पत्रकारों, राजनीतिक विश्लेषकों के बीच हुई चर्चा में आगरा की राजनीति के कई हैरान करने वाले पहलू सामने आए हैं.
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विधायकों से नाराजगी लेकिन मोदी-योगी के नाम पर वोट
आगरा के वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, जिले में क्षेत्रीय विधायकों और सांसदों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर भारी जन-आक्रोश है. लोग सीवर, जर्जर सड़कों, ट्रैफिक और पेयजल की समस्याओं को लेकर जन प्रतिनिधियों से नाराज हैं.
जनता का दर्द: कई बार जब स्थानीय लोग काम लेकर विधायकों के पास जाते हैं तो उन्हें यह सुनने को मिलता है कि 'तुमने वोट तो मोदी और योगी को दिया था, मुझे थोड़ी दिया है.'
कैडर और मतदाता का मूड: विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय कैडर में भी उपेक्षा को लेकर कड़वाहट है. हालांकि चुनाव आते-आते यह नाराजगी गौण हो जाती है और मतदाता सर्वोच्च कुर्सी (चेहरे) को देखकर कमल के निशान पर ही बटन दबाता है.
'ना कोई मुद्दा, ना विकल्प'- बीजेपी के लिए मुफीद स्थिति
चर्चा के दौरान पत्रकारों ने माना कि 1980 के दशक से चले आ रहे आगरा के कई प्रमुख मुद्दे (जैसे यमुना बैराज, हाईकोर्ट बेंच, अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम) आज भी धरातल पर अधूरे हैं.
'1989 के जो मुद्दे थे उन पर आगरा में कुछ नहीं हुआ सिर्फ वादे हुए. 2017 के बाद चेक डैम का शिलान्यास हुआ था जिसका आज तक पता नहीं है. लेकिन इसके बावजूद चुनाव मुद्दों पर नहीं बल्कि हिंदुत्व और मोदी-योगी के चेहरे पर लड़ा जा रहा है. जब तक विपक्ष एकजुट नहीं होता बीजेपी के लिए स्थिति मुफीद बनी रहेगी.'
आगरा में सपा नहीं बीएसपी ही मुख्य प्रतिद्वंद्वी
दलित बाहुल्य जिला होने के कारण आगरा में भारतीय जनता पार्टी की असली फाइट समाजवादी पार्टी के बजाय बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) से मानी जाती है.
सपा का दायरा: समाजवादी पार्टी सिर्फ एतमादपुर और बाह विधानसभा सीटों पर ही मजबूती से फाइट में नजर आती है.
बीएसपी का साइलेंट कार्ड: बाकी की 7 सीटों पर बीएसपी ही मुख्य विपक्षी की भूमिका में रहती है. जानकारों का कहना है कि 2027 से पहले बीएसपी कैडर स्तर पर 2007 वाले पैटर्न पर 'अंडरकरंट' काम कर रही है.
गठबंधन का गणित: विश्लेषकों का मानना है कि अगर सपा, बीएसपी और कांग्रेस अलग-अलग लड़ते हैं तो वोटों का बिखराव बीजेपी को सीधी बढ़त देगा.
2027 में कई विधायकों के टिकट कटने के संकेत!
वरिष्ठ पत्रकारों का अनुमान है कि 2027 के चुनाव में एंटी-इंकंबेंसी और 75 वर्ष की उम्र की सीमा के कारण कई सिटिंग विधायकों के टिकट खतरे में हैं. फतेहपुर सीकरी से बाबूलाल और कुछ अन्य सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है. वहीं आगरा दक्षिण और आगरा उत्तर जैसी शहरी सीटों को पार्टी के लिए सबसे सुरक्षित माना जा रहा है.
कुल मिलाकर स्थानीय शिकायतों और कार्यकर्ताओं के असंतोष के बावजूद फिलहाल आगरा का सियासी पलड़ा भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में ही झुकता नजर आ रहा है.
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