मुजफ्फरनगर सदर सीट पर क्या राकेश शर्मा को टिकट देंगे अखिलेश यादव?

रजत सिंह

• 01:29 PM • 22 Sep 2026

Davedar: मुजफ्फरनगर सदर सीट पर 2027 चुनाव से पहले टिकट की जंग तेज हो गई है. बीजेपी में कपिल देव अग्रवाल और गौरव स्वरूप समेत कई दावेदार हैं, जबकि सपा, बसपा और आजाद समाज पार्टी भी नए सियासी समीकरण साधने में जुटी हैं.

Akhilesh Yadav

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज होते ही पश्चिमी यूपी की वीआईपी सीटों में शुमार मुजफ्फरनगर सदर विधानसभा सीट पर टिकट की जंग बेहद दिलचस्प हो गई है. इस सीट से योगी सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल लगातार तीन बार (एक उपचुनाव और दो सामान्य चुनाव) से विधायक हैं. हालांकि 2027 के महासमर से पहले सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी एक बार फिर अपने हैट्रिक हीरो पर दांव लगाएगी या किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा? दूसरी तरफ INDIA गठबंधन (सपा-कांग्रेस), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और आजाद समाज पार्टी (ASP) के खेमे में भी दावेदारों की लंबी कतार लगी हुई है.

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बीजेपी में मंत्री कपिल देव का दावा मजबूत

बीजेपी के भीतर मुजफ्फरनगर सदर सीट को लेकर खींचतान सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है. लगातार तीन बार जीत दर्ज करने वाले कपिल देव की संगठन और सरकार दोनों में मजबूत पकड़ है. मुजफ्फरनगर सदर सीट पर वैश्य (बनिया) समुदाय का अच्छा-खासा प्रभाव है और इसी समाज से आने के कारण उनका व्यक्तिगत जनाधार काफी मजबूत माना जाता है.

गौरव स्वरूप की मजबूत दावेदारी

सपा सरकार में मंत्री रहे दिवंगत चितरंजन स्वरूप के बेटे गौरव स्वरूप (जो अब बीजेपी में हैं) मंत्री कपिल देव के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं. उनकी पत्नी मीनाक्षी स्वरूप वर्तमान में मुजफ्फरनगर नगर पालिका की अध्यक्ष हैं. अगर पार्टी एंटी-इन्कंबेंसी या विधायक बदलने का रुख अपनाती है तो गौरव स्वरूप का नाम सबसे आगे है.

बीजेपी में केवल गौरव स्वरूप ही नहीं बल्कि वैश्य समाज से आने वाले सुनील तायल, मोहन तायल और महिला कोटे से ममता अग्रवाल समेत करीब 10 से 12 नेता अपनी-अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं.

INDIA गठबंधन (सपा): क्या चलेगा त्यागी-ब्राह्मण या वैश्य कार्ड?

मुजफ्फरनगर सदर से पहले गौरव स्वरूप समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं. लेकिन उनके बीजेपी में जाने के बाद सपा नए सियासी समीकरणों की तलाश में है.

राकेश शर्मा रेस में सबसे आगे: सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर से राकेश शर्मा का नाम सबसे प्रमुखता से लिया जा रहा है. वे लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय हैं और सपा उनके जरिए त्यागी/ब्राह्मण कार्ड खेल सकती है.

गौरव जैन की दावेदारी: सपा लोहिया वाहिनी के पूर्व प्रवक्ता गौरव जैन भी वैश्य समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हुए टिकट की दौड़ में बने हुए हैं.

डॉ. सत्येंद्र और मुस्लिम प्रत्याशी का विकल्प: इनके अलावा डॉ. सत्येंद्र का नाम भी चर्चा में है. वहीं अगर सपा रणनीतिक तौर पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारने का फैसला करती है तो ऐन वक्त पर कोई नया नाम भी सामने आ सकता है.

बसपा का 'ब्राह्मण दांव' और आजाद समाज पार्टी की नजर मुस्लिम वोटबैंक पर

मुख्य मुकाबला बीजेपी और सपा के बीच माना जा रहा है. लेकिन बसपा और आजाद समाज पार्टी (ASP) भी बड़े उलटफेर की तैयारी में हैं.

बसपा बिगाड़ सकती है गणित: चर्चा है कि बहुजन समाज पार्टी इस सीट पर किसी ब्राह्मण प्रत्याशी को मैदान में उतारने का गणित लगा रही है. अगर बसपा ब्राह्मण कार्ड खेलती है तो यह बीजेपी और सपा दोनों के पारंपरिक वोटबैंक में सेंध लगाकर चुनावी खेल बिगाड़ सकती है.

आजाद समाज पार्टी (ASP) का रुख: मुजफ्फरनगर में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं. यदि मुख्य दलों (सपा/बीजेपी) में से कोई मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारता है तो चंद्रशेखर आजाद की पार्टी (ASP) यहां से किसी मुस्लिम चेहरे पर दांव खेलकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती है.

टिकट का संग्राम: किसके सिर सजेगा सेहरा?

कुल मिलाकर मुजफ्फरनगर सदर सीट पर जहां एक तरफ बीजेपी के सामने अपने ही कुनबे के दर्जनभर दावेदारों को साधने की चुनौती है. वहीं सपा और बसपा जातीय समीकरणों का नया जोड़-तोड़ करने में जुटी हैं. अब देखना यह होगा कि आगामी चुनाव में हाईकमान पुराने सिपहसालार कपिल देव अग्रवाल पर ही भरोसा जताता है या फिर गौरव स्वरूप या राकेश शर्मा जैसे चेहरे बाजी मार ले जाते हैं.


 

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