पश्चिम यूपी के जाट, गुर्जर, किसानों का वोट किसके पाले में जाएगा? सियासी पारा हाई, नितिन नबीन के दौरे पर नया अपडेट

यूपी तक

• 12:12 PM • 21 Sep 2026

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी में बीजेपी, कांग्रेस, सपा और आरएलडी की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं. बीजेपी बूथ स्तर पर संगठन मजबूत कर रही है, जबकि कांग्रेस किसान अधिकार यात्रा और सपा सामाजिक समूहों के बीच संपर्क बढ़ाने पर फोकस कर रही है.

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी का सियासी माहौल धीरे-धीरे गर्म होने लगा है. भाजपा, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आरएलडी ने अपने-अपने तरीके से संगठन को मजबूत करने और लोगों के बीच पहुंच बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है. इस क्षेत्र में किसान, जाट और गुर्जर समुदायों की बड़ी मौजूदगी है, इसलिए यहां की राजनीतिक गतिविधियों पर सभी दलों की नजर है.

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भाजपा बूथ स्तर तक अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है, जबकि कांग्रेस किसानों के मुद्दों को लेकर किसान अधिकार यात्रा निकालने जा रही है. वहीं, समाजवादी पार्टी और आरएलडी सामाजिक समूहों के नेताओं से संपर्क बढ़ा रहे हैं. ऐसे में सवाल यह है कि 2027 के चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी में किस तरह की राजनीतिक गतिविधियां जोर पकड़ेंगी?

भाजपा का बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने पर जोर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा का संगठन 14 जिलों और 71 विधानसभा क्षेत्रों तक फैला हुआ है. आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी तैयारियों को मजबूत करने में जुटी है.

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन सोमवार से पश्चिमी यूपी के दौरे पर हैं. उनके दौरे का मुख्य फोकस बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना, पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से सीधे बातचीत करना और क्षेत्र के राजनीतिक हालात पर फीडबैक लेना है.

भाजपा के मुताबिक, नितिन नबीन 21 सितंबर को मेरठ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शक्ति केंद्र संयोजकों के साथ बातचीत करेंगे. इस दौरान वह सांसदों, विधायकों, पूर्व जनप्रतिनिधियों और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे. इसके बाद 22 सितंबर को नबीन सहारनपुर में संगठनात्मक बैठकों में हिस्सा लेंगे और मां शाकुंभरी देवी मंदिर के दर्शन करेंगे.

करीब 5 हजार शक्ति केंद्र संयोजकों से संवाद

भाजपा पश्चिमी यूपी के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर ने बताया कि नितिन नबीन क्षेत्र के करीब 5,000 शक्ति केंद्र संयोजकों से बातचीत करेंगे.

नागर ने कहा, "बातचीत के दौरान बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल, जिला और क्षेत्रीय स्तर पर संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं की गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों की तैयारियों के बारे में जानकारी ली जाएगी."

भाजपा का अभियान केवल नेताओं की बैठकों तक सीमित नहीं है. पार्टी संगठन के अलग-अलग स्तरों की स्थिति जानकर आगामी कार्यक्रमों की तैयारियों पर भी फोकस कर रही है. पश्चिमी यूपी में चुनावी तैयारी के लिहाज से बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की भूमिका जरूरी मानी जाती है.

कांग्रेस की किसान अधिकार यात्रा, 2 अक्टूबर से शुरु

भाजपा के संगठनात्मक अभियान के बीच कांग्रेस ने भी पश्चिमी यूपी में अपनी सक्रियता बढ़ाने का कार्यक्रम घोषित किया है. पार्टी मुजफ्फरनगर से किसान अधिकार यात्रा निकालने जा रही है.

कांग्रेस के मुताबिक, यात्रा 2 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक चलेगी और गौतम बुद्ध नगर में समाप्त होगी. यात्रा के जरिए किसानों और कृषि से जुड़े दूसरे वर्गों के मुद्दों को उठाने की तैयारी है.

पश्चिमी यूपी के जाट समुदाय से जुड़े कांग्रेस नेता चौधरी यशपाल सिंह ने बताया कि यात्रा में किसान, खेत मजदूर, महिला किसान, ग्रामीण युवा, पशुपालक और कृषि से जुड़े अन्य वर्गों की समस्याओं और अधिकारों को उठाया जाएगा.

उन्होंने कहा, "यात्रा छह जिलों से होकर गुजरेगी. इसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में जनसंपर्क बढ़ाना और संगठन को मजबूत करना है."

अखिलेश यादव और जयंत चौधरी भी सामाजिक संपर्क बढ़ाने में जुटे

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और आरएलडी की गतिविधियां भी चर्चा में हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में सहारनपुर दौरे के दौरान गुर्जर नेताओं इंद्रसेन चौधरी और रुद्रसेन से उनके आवास पर मुलाकात की थी. इसके अगले दिन केंद्रीय मंत्री और आरएलडी अध्यक्ष जयंत चौधरी भी सहारनपुर पहुंचे. 

पश्चिमी यूपी में आगे बढ़ेगी राजनीतिक हलचल

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट, गुर्जर और किसान समुदायों की बड़ी मौजूदगी के कारण इलाका राजनीतिक रूप से खास है. यहां किसान और ग्रामीण मुद्दों को लेकर पहले से ही राजनीतिक सक्रियता देखने को मिलती रही है.

2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन विभिन्न दलों की शुरुआती गतिविधियों से साफ है कि संगठन और जनसंपर्क पर जोर बढ़ रहा है. भाजपा बूथ स्तर पर अपनी तैयारी को आगे बढ़ा रही है, कांग्रेस किसान मुद्दों के साथ यात्रा निकालने जा रही है और सपा-आरएलडी सामाजिक समूहों के बीच संपर्क मजबूत करने में जुटे हैं.

आने वाले महीनों में स्थानीय मुद्दों से जुड़े समूहों, किसान संगठनों, सामाजिक नेताओं और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की राजनीतिक कार्यक्रमों में भागीदारी बढ़ सकती है. इन गतिविधियों के जरिए पश्चिमी यूपी में चुनावी चर्चा का रुख तय करने की कोशिशें तेज होने के आसार हैं.