यूपी Tak के खास शो 'आज का यूपी' में हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण करते हैं. आज की पहली बड़ी खबर बहुजन समाज पार्टी (BSP) के भीतर चल रहे पारिवारिक घमासान की है, जहां मायावती लगातार आकाश आनंद और अपने परिवार पर हमलावर हैं. जबकि आकाश ने खुद को राजनीति से पूरी तरह अलग कर चुप्पी साध ली है. दूसरी बड़ी खबर मायावती द्वारा समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर बोला गया तीखा हमला है जिसमें उन्होंने सपा के पीडीए (PDA) रथ के भगवा रंग को लेकर सवाल उठाते हुए मुस्लिम मतदाताओं को सचेत किया है. वहीं तीसरी बड़ी खबर बीएसपी के लगातार गिरते वोट शेयर और 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी कैडर व समर्थकों के बीच खड़े हो रहे राजनीतिक संकट व अन्य दलों की नजरों की है.
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बीएसपी में पारिवारिक घमासान
बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी, पद और अपनी राजनीतिक विरासत से पूरी तरह अलग कर चुकी हैं. इसके बावजूद वह लगातार सोशल मीडिया (X) और बयानों के जरिए आकाश आनंद पर निशाना साध रही हैं. हाल ही में उन्होंने एक लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखकर बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों का हवाला देते हुए अपने इस फैसले को सही ठहराने की कोशिश की है.
मायावती के इस बदले रुख से पार्टी कैडर में दुविधा की स्थिति है. एक तरफ जहां आकाश आनंद की बहन दीपिका को पार्टी में शामिल होने का ऑफर देने के बाद कोई आधिकारिक जवाब न मिलने पर मायावती भड़की हुई दिख रही हैं. वहीं दूसरी तरफ आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ के संन्यास लेने के बावजूद आकाश को बाहर का रास्ता दिखाया गया. इस बीच आकाश आनंद ने अपने मोबाइल से 'X' हटाकर पूरी तरह से राजनीतिक बयानबाजी से दूरी बना ली है. वहीं मायावती ने अपने दूसरे भतीजे ईशान आनंद की पार्टी में वापसी करा दी है. परिवार को लेकर बार-बार बदलते इस स्टैंड ने पार्टी कार्यकर्ताओं को भ्रम में डाल दिया है कि आखिर बीएसपी की भावी रणनीति क्या है.
अखिलेश यादव पर मायावती का हमला
पारिवारिक विवाद के बयानों के बीच मायावती ने उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है. मायावती ने अखिलेश यादव के बहुचर्चित 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे पर सवाल उठाए.
मायावती ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव के पीडीए रथ में अब 'भगवा रंग' दिखाई देने लगा है. उन्होंने विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय को आगाह करते हुए कहा कि मुस्लिम मतदाताओं को सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए और यह देखना चाहिए कि कौन सा दल वास्तव में उनके हितों की बात करता है. मायावती का यह हमला बीएसपी के पारंपरिक मुस्लिम-दलित समीकरण को साधने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
बीएसपी के घटते वोट बैंक की चिंता
बीएसपी के भीतर जारी इस अंतर्कलह का सबसे बड़ा असर संगठन की तैयारियों पर पड़ता दिख रहा है. 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है. लेकिन संगठन में चुनाव लड़ने और रणनीति बनाने के बजाय सिर्फ पारिवारिक विवादों की ही चर्चा हो रही है.
आंकड़ों की बात करें तो 2024 के लोकसभा चुनावों में बीएसपी का वोट शेयर घटकर महज 8 से 9 प्रतिशत के आसपास रह गया था. हालांकि पार्टी का कैडर आज भी मायावती के प्रति वफादार है. लेकिन आम वोटरों के भीतर मायूसी साफ देखी जा रही है. मायावती के इस ढुलमुल रवैये के कारण विपक्षी दलों (सपा और भाजपा) की नजरें अब बीएसपी के उस पारंपरिक दलित वोट बैंक पर टिक गई हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या मायावती 2027 के चुनाव से पहले अपने कोर वोट बैंक को एकजुट रख पाएंगी या बीएसपी का जनाधार और नीचे खिसकेगा.
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