ब्राह्मण नेताओं की सीट पर राकेश सिंह और अभय सिंह की एंट्री, कैसे संभालेगी बीजेपी?

कुमार अभिषेक

• 08:36 AM • 15 Oct 2026

यूपी की राजनीति में राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी के बीजेपी में शामिल होने से हलचल तेज है. गौरीगंज और गोसाईगंज में टिकट समीकरणों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन महीने में पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया.

Abhay Singh and Rakesh Pratap Singh

Abhay Singh and Rakesh Pratap Singh

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों तेजी से राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं. समाजवादी पार्टी के बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी ने आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थाम लिया है. अमेठी के गौरीगंज में हुए एक भव्य जॉइनिंग कार्यक्रम में इन नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व की मौजूदगी में भगवा पट्टा पहना. हालांकि इस हाई-प्रोफाइल एंट्री के बाद जहां एक ओर बीजेपी खेमे में उत्साह है. वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर टिकट और जातिगत समीकरणों को लेकर अंदरखाने सुगबुगाहट तेज हो गई है. इसके अलावा पंचायत चुनावों को लेकर आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक बड़े फैसले ने भी सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है.

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गौरीगंज और गोसाईगंज में ठाकुर बनाम ब्राह्मण सीटों का पेंच

सपा से बगावत कर बीजेपी में शामिल हुए राकेश प्रताप सिंह (गौरीगंज) और अभय सिंह (गोसाईगंज) दोनों ही ठाकुर समुदाय से आते हैं. खास बात यह है कि गौरीगंज और गोसाईगंज सीटें पारंपरिक रूप से बीजेपी के लिए मजबूत ब्राह्मण सीटें रही हैं जहां पार्टी ने पहले ब्राह्मण उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था और जीत भी हासिल की थी.

गौरीगंज सीट: राकेश प्रताप सिंह के यहां से बीजेपी में शामिल होने के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि वह इसी सीट से दावेदारी करेंगे.

गोसाईगंज सीट: अभय सिंह की इस सीट पर पहले खब्बू तिवारी का प्रभाव रहा है.ऐसे में पार्टी के सामने इन दोनों ठाकुर चेहरों को एडजस्ट करने और पारंपरिक ब्राह्मण मतदाताओं व नेताओं को साधने की बड़ी चुनौती होगी.

भीतरखाने नाराजगी और दिग्गजों की दूरी

गौरीगंज में आयोजित इस भव्य जॉइनिंग कार्यक्रम के दौरान कुछ बड़े चेहरों की गैर-मौजूदगी ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींचा है.

चंद्रप्रकाश मिश्रा मटियारी: जो पिछले विधानसभा चुनाव में गौरीगंज से बीजेपी के उम्मीदवार रहे थे और राकेश प्रताप सिंह को कड़ी टक्कर दी थी, वे इस कार्यक्रम में नजर नहीं आए. उनकी नाराजगी साफ झलक रही है. हालांकि मटियारी का कहना है कि पार्टी नेतृत्व ही फैसला करेगा और किसी के पार्टी में आने मात्र से टिकट पक्का नहीं हो जाता.

राजा संजय सिंह: अमेठी राजघराने के बड़े चेहरे संजय सिंह भी इस जॉइनिंग से दूर रहे.

इन नेताओं की दूरी इस बात की ओर इशारा करती है कि पार्टी के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर खींचतान देखने को मिल सकती है. चर्चा यह भी है कि यदि मटियारी को टिकट नहीं मिला, तो वे समाजवादी पार्टी या अन्य विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं. वहीं खब्बू तिवारी को लेकर भी पार्टी कोई दूसरी सीट या अयोध्या विकल्प पर विचार कर सकती है ताकि संतुलन बना रहे.

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 3 महीने के भीतर कराने होंगे पंचायत चुनाव

राजनीतिक उठापटक के बीच न्यायपालिका की ओर से एक बहुत बड़ा आदेश सामने आया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो जजों की बेंच ने 'दशरथ यादव बनाम सरकार' मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि अगले 3 महीने के भीतर पंचायत चुनाव पूरे कराए जाएं.

अदालत ने स्पष्ट किया है कि चुनाव कराने की समयसीमा में अब कोई और विस्तार नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासकों (वर्तमान ग्राम प्रधानों) के आदेश को वैध करार देते हुए उनके खिलाफ दाखिल याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है.

सरकार के सामने दोहरी चुनौती

चूंकि अगले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी होने हैं, ऐसे में सरकार और प्रशासनिक तंत्र के सामने एक साथ या पैरेलल पंचायत चुनाव कराना एक बड़ी कानूनी और प्रशासनिक चुनौती बन गया है. अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख करती है या फिर तय समयसीमा में पंचायत चुनाव संपन्न कराने की तैयारी करती है.

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