बीजेपी छोड़ अखिलेश यादव के साथ आए बृजभूषण शरण सिंह के करीबी भवानी भीख शुक्ला कौन हैं?

यूपी के गोंडा में जिला पंचायत सदस्य भवानी भीख शुक्ला ने चार भाइयों और परिवार के साथ अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा जॉइन की. बृजभूषण शरण सिंह के करीबी माने जाने वाले परिवार ने बीजेपी पर उपेक्षा के आरोप लगाए हैं.

Bhavani Bhik Shukla

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में हवाओं का रुख किस तरह बदलता है इसकी एक तस्वीर गोंडा जिले में देखने को मिली है. गोंडा की सियासत में उस वक्त सियासी गलियारों का पारा चढ़ गया, जब जिला पंचायत सदस्य भवानी भीख शुक्ला ने अपने चार भाइयों और पूरे परिवार के साथ समाजवादी पार्टी (SP) का दामन थाम लिया. इस सियासी हलचल के केंद्र में वह परिवार है जिसके सभी भाइयों के नाम भगवान के स्वरूपों पर हैं श्री भगवान शुक्ला, कृष्ण भगवान शुक्ला, शिव भगवान शुक्ला, विष्णु भगवान शुक्ला और शंकर भगवान शुक्ला. हालांकि, इस जॉइनिंग की सबसे बड़ी चर्चा का विषय यह है कि इस परिवार को पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का बेहद करीबी माना जाता रहा है.

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अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा में एंट्री

राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी और पार्टी मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भवानी भीख शुक्ला और उनके पूरे परिवार ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की. इस दौरान अखिलेश यादव ने खुद सभी भाइयों के नाम लेकर उनका पार्टी में गर्मजोशी से स्वागत किया.परिवार का सपा में आना गोंडा के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.

बीजेपी से मोहभंग की वजह 

पार्टी बदलने के पीछे के कारणों पर बात करते हुए परिवार के सदस्यों ने खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से बीजेपी से जुड़े रहे और बृजभूषण शरण सिंह के करीबी माने जाते थे, लेकिन पिछले कुछ समय से वे पार्टी के भीतर खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि एक साल पहले उन पर और उनके परिवार पर हमला हुआ था, यहां तक कि उन्हें मारा-पीटा गया और वे अस्पताल में भर्ती भी रहे. लेकिन बीजेपी विधायक के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और न ही मुकदमा दर्ज किया गया. इसी व्यवस्था और उपेक्षा से तंग आकर उन्होंने यह सियासी कदम उठाया.

बृजभूषण सिंह से रिश्तों पर क्या बोले शुक्ला परिवार?

भले ही उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है लेकिन परिवार ने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के प्रति अपने पुराने सम्मान को बरकरार रखा है. बातचीत के दौरान उन्होंने साफ किया कि बृजभूषण सिंह से इस फैसले को लेकर कोई बातचीत या सलाह नहीं ली गई थी और वे आज भी उनका व्यक्तिगत रूप से सम्मान करते हैं. लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां और स्थानीय उपेक्षा के चलते उन्होंने सपा का रास्ता चुना है.

गोंडा की राजनीति पर क्या होगा असर?

गोंडा जिले में कुल 7 विधानसभा सीटें आती हैं. बृजभूषण शरण सिंह के प्रभाव वाले क्षेत्र में उनके करीबी माने जाने वाले इस ब्राह्मण परिवार का सपा में शामिल होना विपक्षी खेमे के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक दांव माना जा रहा है. हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तस्वीरें और जॉइनिंग अपनी जगह हैं, लेकिन इस कदम का जमीन पर कितना असर पड़ेगा और आने वाले चुनावों में यह गोंडा के सियासी समीकरणों को कितना बदल पाएगा यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा.
 
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