उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वाले समीकरण पर सियासी बहस तेज हो गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में शिक्षक सम्मेलन के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा.
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उन्होंने उद्योग जगत से जुड़े धनराज परिमल नाथवानी को राज्यसभा भेजने के फैसले पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सपा ने PDA की बात करने के बावजूद टिकट बंटवारे में इन वर्गों को प्राथमिकता नहीं दी.
योगी ने सपा के PDA की व्याख्या करते हुए तंज कसा कि इसका मतलब 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' या 'पराया धन अपना' हो सकता है. उन्होंने कहा कि सपा ने एक सीट पर अपने चाचा राम गोपाल यादव को उम्मीदवार बनाया, जबकि दूसरी सीट पर किसी दलित, मुस्लिम या दूसरे पिछड़े वर्ग के नेता को मौका देने के बजाय मुंबई के एक कारोबारी को टिकट दे दिया.
योगी ने कहा- काशी, गाजीपुर या बलिया के यादव को टिकट दे सकते थे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा, “मैं पूछना चाहता हूं समाजवादियों से, ये लोग जो PDA चिल्लाते थे, वो राज्यसभा टिकट में PDA कहां चला गया!”
उन्होंने आगे कहा कि सपा चाहती तो काशी, गाजीपुर या बलिया के किसी यादव नेता को राज्यसभा भेज सकती थी. दूसरी सीट पर किसी दलित, अल्पसंख्यक या अपने पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक से जुड़े नेता को मौका दिया जा सकता था.
योगी ने आरोप लगाया कि सपा ने ऐसा करने के बजाय दूसरी सीट कारोबारी धनराज नाथवानी को दे दी. उन्होंने इसे परिवारवाद और कारोबारी हितों से जोड़ते हुए पार्टी पर निशाना साधा.
धनराज नाथवानी को टिकट देने पर क्यों सवाल?
समाजवादी पार्टी ने 30 सितंबर को राज्यसभा चुनाव के लिए वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को अपना उम्मीदवार घोषित किया था. दोनों ने लखनऊ में अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया था.
धनराज नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ कारोबारी हैं. वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं. उनके पिता परिमल नाथवानी झारखंड से NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा पहुंचे हैं.
सपा के इस फैसले पर इसलिए भी सवाल उठे क्योंकि पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी में PDA को अपनी प्रमुख राजनीतिक रणनीति के तौर पर पेश कर रही है. PDA का मतलब पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक है. पार्टी के आलोचकों का कहना है कि राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में इस सामाजिक समीकरण को पर्याप्त जगह नहीं मिली.
राज्यसभा चुनाव में क्या हुआ?
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना था. सपा ने दो उम्मीदवार उतारे, जबकि भाजपा ने आठ उम्मीदवार मैदान में उतारे. सपा ने तीसरी सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा. इसके बाद 9 अक्टूबर को सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए. इनमें सपा के राम गोपाल यादव और धनराज नाथवानी भी शामिल हैं.
इस चुनाव में उम्मीदवारों के चयन को लेकर PDA की राजनीति पर बहस हुई. भाजपा नेताओं ने सपा के फैसले को परिवारवाद से जोड़कर निशाना साधा, जबकि सपा ने कारोबारी जगत से जुड़ाव बढ़ाने की रणनीति के तहत नाथवानी के चयन का बचाव किया.
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