फिर बढ़ने वाली हैं सपा नेता आजम खान की मुश्किलें, जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में ED ने लिया एक्शन

आमिर खान

14 Oct 2026 (अपडेटेड: 14 Oct 2026, 11:10 AM)

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में ईडी ने रामपुर के अजीमनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है. इससे पहले उनसे जेल में आठ घंटे पूछताछ हुई थी.

Azam Khan

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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई है. यह कार्रवाई रामपुर के अजीमनगर थाने में की गई है. फिलहाल आजम खान की ओर से इस FIR पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.  

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ईडी के डिप्टी डायरेक्टर की तहरीर पर दर्ज हुई FIR

मिली जानकारी के मुताबिक, ईडी के लखनऊ कार्यालय में तैनात डिप्टी डायरेक्टर पीयूष एस. थ्रोट की लिखित शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है. यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 66(2) के तहत मिली शक्तियों और शिकायतों के आधार पर अजीमनगर थाने में दर्ज हुआ है. मामले की जांच के लिए जांच अधिकारी पंकज पंत को नियुक्त किया गया है. 

इस FIR के दायरे में पूर्व मंत्री आजम खान, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, जौहर यूनिवर्सिटी और कुछ ठेकेदार शामिल हैं. 

क्या आरोप लगाए गए हैं?

ED के पत्र के मुताबिक, आरोप है कि रामपुर में जौहर यूनिवर्सिटी के लिए 26 किसानों की जमीन और सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया था. इस मामले में पहले दर्ज FIR का भी हवाला दिया गया है. ED के पत्र में दिए गए आकलन के मुताबिक, यूनिवर्सिटी परिसर की इमारतों के निर्माण की लागत करीब 494.46 करोड़ रुपये बताई गई है. वहीं ट्रस्ट ने 2013-14 से 2024-25 के बीच अपने आयकर रिटर्न में 78.32 करोड़ रुपये का कुल पूंजीगत खर्च दिखाया. इस तरह करीब 416.14 करोड़ रुपये के निर्माण खर्च का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं मिला है.

ईडी के पत्र में आरोप लगाया गया है कि सरकारी ठेकों से जुड़े निर्माण सामग्री का उपयोग यूनिवर्सिटी के निर्माण में किया गया. साथ ही सरकारी धन से कुछ निर्माण कार्य करवाकर उनका मालिकाना हक बाद में यूनिवर्सिटी को सौंप दिया गया. ऐसे कार्यों की राशि लगभग 85.81 करोड़ रुपये बताई गई है.

ट्रस्ट को मिले कुछ दान की असलियत पर भी सवाल उठाए गए हैं. पत्र में ठेके हासिल करने वाली कंपनियों और ट्रस्ट को मिले दान के बीच संबंध होने की आशंका जताई गई है.

किन गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ केस?

इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61, 316(5) और 318(4) के तहत भी FIR दर्ज की गई है. इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13(1) और 13(2) भी लगाई गई हैं. इन धाराओं के तहत दर्ज मामले में कथित वित्तीय गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की जांच की जा सकती है. फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में एफआईआर में लगाए गए आरोपों का पूरा ब्योरा सामने नहीं आया है.

इन धाराओं के तहत वित्तीय गड़बड़ियों, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की गहन जांच की जा रही है.पुलिस और जांच एजेंसियां अब साक्ष्यों को खंगालने में जुटी हैं.

क्या है मामला?

जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा यह पूरा विवाद पैसों के लेन-देन में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है. जांच एजेंसी को इस बात का शक है कि ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी को मिले फंड्स के स्रोतों और उनके खर्च में नियमों की अनदेखी की गई है. ईडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ट्रस्ट को मिलने वाला पैसा कहां से आया और उसे किन कार्यों में इस्तेमाल किया गया. इस मामले में सरकारी ठेकेदारों से जुड़े लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है.

इससे पहले 13 अक्टूबर को ईडी की टीम ने रामपुर जेल में बंद आजम खान से करीब आठ घंटे तक पूछताछ की थी. इसके बाद अब आधिकारिक रूप से अजीमनगर थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है. इस पूरी कार्रवाई पर फिलहाल आजम खान या उनके करीबियों की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पुलिस और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी.

 

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