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यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, इलेक्शन के लिए दिया बस इतना टाइम

UP Panchayat Election 2026: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव और ओबीसी आरक्षण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश से हलचल तेज हो गई है. कोर्ट ने तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है.

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उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारी और ओबीसी आरक्षण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है. हाईकोर्ट के आदेश से साफ है कि अब यूपी में तीन महीने के अंदर पंचायत होंगे. हाईकोर्ट का आदेश सामने आने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है. 

इससे पहले 9 अक्टूबर को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर असंतोष जताया था. कोर्ट ने आयोग के आंकड़े जुटाने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा था कि रिपोर्ट देखकर ऐसा लगता है कि आयोग ने फील्ड में जाकर जानकारी जुटाने के बजाय दफ्तर में बैठकर इसे तैयार कर दिया है.

ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर क्यों उठा सवाल?

हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे. सुनवाई के दौरान आगरा जिले का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने कहा कि यहां ओबीसी आबादी तीन लाख से अधिक है. इसके बावजूद अखबारों में विज्ञापन देने के बाद आयोग के सामने केवल 179 लोग पहुंचे.

इन 179 लोगों में से भी महज 29 लोगों के बयान दर्ज किए गए. कोर्ट ने इस संख्या के आधार पर आयोग से सवाल किया कि आखिर जातिवार सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का आकलन किस तरह किया जा रहा है.

आरक्षण तय करने की प्रक्रिया में संबंधित वर्गों की वास्तविक स्थिति का आकलन अहम होता है. इसी वजह से आंकड़े जुटाने के तरीके और रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर कोर्ट की टिप्पणी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

किस पीठ ने सुनाया आदेश?

आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने सुनाया. पीठ दशरथ यादव की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

कोर्ट की टिप्पणी और चुनाव कराने की समयसीमा से जुड़े निर्देश के बाद पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पर सबकी नजर रहेगी. हालांकि, चुनाव की तारीख, आरक्षण की अंतिम सूची और चुनाव कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है.

निवर्तमान ग्राम प्रधानों को लेकर भी अहम बात

पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक निवर्तमान ग्राम प्रधानों के प्रशासक बने रहने की बात भी सामने आई है. इससे गांवों में पंचायतों के प्रशासनिक कामकाज को जारी रखने की व्यवस्था बनी रहेगी. हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव की तैयारियों, कार्यक्रम और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को लेकर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी.
 

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