अकेले लड़े तो नुकसान सिर्फ कांग्रेस का होगा... इमरान मसूद के अल्टीमेटम का इकरा हसन ने दे दिया जवाब

कुमार अभिषेक

22 Sep 2026 (अपडेटेड: 22 Sep 2026, 12:36 PM)

यूपी में 2027 चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर खींचतान बढ़ गई है. इमरान मसूद के बयानों पर इकरा हसन ने जवाब देते हुए कहा कि अखिलेश यादव ही बीजेपी को हरा सकते हैं और अकेले लड़ने पर कांग्रेस को नुकसान होगा.

Imran Masood VS Iqra Hasan

Imran Masood VS Iqra Hasan

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भले ही लखनऊ से दिल्ली तक सपा और कांग्रेस के नेता गठबंधन की बातें कर रहे हों. लेकिन धरातल पर सियासी शह-मात का खेल बेहद तेज हो गया है.पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सीट-शेयरिंग को लेकर जारी अंदरूनी घमासान के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कांग्रेस को घेरने के लिए अपनी रणनीति बदल दी है. सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की ओर से लगातार आ रहे अल्टीमेटम और तीखे बयानों पर अब तक खामोश रही समाजवादी पार्टी ने कैराना से सांसद इकरा हसन को फ्रंटफुट पर उतार दिया है.

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इकरा हसन ने इमरान मसूद के बयानों को खारिज करते हुए दो-टूक कह दिया है कि यूपी में सिर्फ अखिलेश यादव ही भाजपा को हरा सकते हैं और अगर कांग्रेस अकेले लड़ी तो नुकसान सिर्फ उसी का होगा.

सीटें तय हों वरना अपनी तैयारी खुद करेंगे- इमरान मसूद

सीट शेयरिंग में हो रही देरी से नाराज कांग्रेस सांसद इमरान मसूद पिछले कुछ समय से लगातार सपा पर हमलावर हैं और बार्गेनिंग पावर बढ़ाने के लिए दबाव बना रहे हैं. इमरान मसूद का कहना है कि अखिलेश यादव कितने सक्रिय दिखते हैं, यह मायने नहीं रखता. अगर गठबंधन होना है तो उसे तुरंत अंतिम रूप दिया जाना चाहिए वरना जमीनी स्तर पर नुकसान होगा. उन्होंने साफ कहा कि अगर सपा जल्द फैसला नहीं लेती है तो कांग्रेस सहारनपुर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी करेगी. मसूद का दावा है कि भाजपा को केवल राहुल गांधी का नेतृत्व और कांग्रेस ही हरा सकती है. इसलिए सपा को बड़ा दिल दिखाना चाहिए.

अकेले लड़े तो नुकसान सिर्फ कांग्रेस का होगा- इकरा हसन

इमरान मसूद के सवालों का जवाब देने के लिए समाजवादी पार्टी ने उनके ही गढ़ (सहारनपुर) में सांसद इकरा हसन को आगे किया. इकरा ने बेहद आक्रामक अंदाज में कांग्रेस को सियासी संदेश दिया. इकरा हसन ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सिर्फ अखिलेश यादव ही ऐसे एकमात्र नेता हैं जो भाजपा को हराने में सक्षम हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कांग्रेस अकेले लड़ने का मन बना रही है तो यह उसकी भारी भूल होगी. अकेले लड़कर कांग्रेस कुछ हासिल नहीं कर सकती. इकरा ने आगे कहा कि गठबंधन रहेगा तो ठीक लेकिन अगर गठबंधन टूटता है तो जो भी नुकसान होगा वह सिर्फ कांग्रेस का होगा, सपा का नहीं.

कांग्रेस की काट के लिए क्यों चुनी गईं इकरा हसन?

सपा ने इमरान मसूद के बयानों को बेहद गंभीरता से लिया क्योंकि चुप्पी साधने से पूरे पश्चिम यूपी में सपा के कमजोर पड़ने का संदेश जा रहा था.अगर खुद अखिलेश यादव या सपा का कोई राष्ट्रीय वरिष्ठ नेता इमरान मसूद को जवाब देता तो इससे उनका राजनीतिक कद और बढ़ता. इसलिए सपा ने उनके सामने पश्चिम यूपी का एक शिक्षित, युवा और बेहद लोकप्रिय मुस्लिम चेहरा खड़ा किया.

सहारनपुर से सीधा कनेक्शन

जिस सहारनपुर से इमरान मसूद आते हैं उसी जिले की दो विधानसभा सीटें इकरा हसन के कैराना लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं. इसलिए इकरा के बयान का सीधा असर इमरान के सियासी आधार पर पड़ता है.

पश्चिम यूपी में मुस्लिम समीकरण साधने का दांव

इकरा हसन को आगे कर समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को करारा जवाब देने के साथ-साथ कई रणनीतिक निशाने साधे हैं.

मुस्लिम मतदाताओं को संदेश: सपा ने अपने 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मॉडल पर भरोसा जताते हुए साफ कर दिया कि पश्चिम यूपी में मुस्लिम मतदाताओं की पहली पसंद आज भी अखिलेश यादव ही हैं.

कांग्रेस की बार्गेनिंग पावर कमजोर की: इमरान मसूद के 'अकेले लड़ने' के दांव की हवा सपा ने एक ही झटके में निकाल दी.

जमीनी हकीकत का अहसास: सपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस 'दया' के आधार पर नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की धरातलीय स्थिति को देखकर ही गठबंधन की मेज पर बात करे.

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