लखनऊ में आयोजित समाजवादी पार्टी की सांगठनिक बैठक के दौरान पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के सामने एटा के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव से भिड़ने के बाद सपा नेता मंजीत यादव एकाएक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं. इस तीखी झड़प के बाद सपा नेतृत्व ने एटा और कासगंज जिलों की पूरी सांगठनिक और फ्रंटल इकाइयों को भंग कर दिया. लेकिन आखिर कौन हैं मंजीत यादव और सपा में उनका राजनीतिक कद कितना बड़ा है? आइए जानते हैं उनकी पूरी प्रोफाइल.
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एटा के बड़े राजनीतिक परिवार से ताल्लुक
मंजीत यादव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के एटा जिला के रहने वाले हैं. उनका परिवार क्षेत्र की राजनीति में गहरा रसूख रखता है.
रमेश यादव के भतीजे: मंजीत यादव उत्तर प्रदेश विधान परिषद के पूर्व अध्यक्ष (चेयरमैन) रमेश यादव के सगे भतीजे हैं.
बीजेपी MLC के भाई: इनके भाई आशीष यादव वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) से विधान परिषद सदस्य (MLC) हैं.
जिला पंचायत से राजनीतिक पहचान
2016 में बने सदस्य: मंजीत यादव साल 2016 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में एटा के वॉर्ड नंबर 8 से समाजवादी पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी के रूप में जिला पंचायत सदस्य चुने गए थे.
साइकिल यात्रा का नेतृत्व: इससे पहले साल 2014 में उन्होंने जिला पंचायत सदस्य रहते हुए सपा की ओर से निकाली गई सांगठनिक साइकिल यात्रा का नेतृत्व भी किया था.
'यादव परिवार' से नजदीकी और कासगंज से दावपेंच
वर्तमान में इटावा में निवास कर रहे मंजीत यादव की गिनती सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उनके परिवार के बेहद करीबियों में होती है. सूत्रों और स्थानीय सियासी गलियारों के अनुसार, मंजीत यादव 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कासगंज सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के प्रबल इच्छुक हैं.
बैठक में क्या हुआ था?
लखनऊ में आयोजित पार्टी की बैठक में एटा और कासगंज के करीब 250 वरिष्ठ नेता व पदाधिकारी मौजूद थे. जब पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव अपनी बात रख रहे थे, तब मंजीत यादव ने उनकी कुछ टिप्पणियों पर आपत्ति जताई. देखते ही देखते यह बहस तीखी कहासुनी और अभद्र भाषा में तब्दील हो गई. अखिलेश यादव ने इस अनुशासनहीनता पर सख्त नाराजगी जताई और "यह सब पैसे का अहंकार है" कहते हुए बैठक बीच में छोड़ दी. इसके तुरंत बाद सपा प्रदेश अध्यक्ष द्वारा एटा और कासगंज की सभी जिला कार्यकारिणी, फ्रंटल संगठनों और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से भंग करने का आदेश जारी कर दिया गया.
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