क्या लखीमपुर सदर की कुर्मी दबदबे वाली सीट जीत पाएगी सपा?

रजत सिंह

• 02:30 PM • 22 Sep 2026

UP Kiska: लखीमपुर सदर सीट पर 2027 चुनाव से पहले बीजेपी और सपा के बीच सियासी मुकाबला दिलचस्प है. योगेश वर्मा के सामने हैट्रिक की चुनौती है जबकि सपा कुर्मी, मुस्लिम और अन्य समीकरणों के सहारे सीट वापस पाने की रणनीति बना रही है.

CM Yogi And Akhilesh Yadav

CM Yogi And Akhilesh Yadav (File Photo)

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उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की सदर विधानसभा सीट का सियासी इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है. यह एक ऐसी सीट है जहां मुस्लिम और कुर्मी वोटों के समीकरण के दम पर 2012 तक समाजवादी पार्टी का एकछत्र राज रहा. हालांकि 2017 और 2022 के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस किले पर कब्जा जमाया और योगेश वर्मा लगातार दो बार विधायक बने. दिलचस्प मोड़ यह है कि 2012 में सपा से विधायक रहे उत्कर्ष वर्मा अब 2024 के लोकसभा चुनाव में लखीमपुर खीरी से सांसद चुने जा चुके हैं. ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा सवाल यह है कि क्या बीजेपी के योगेश वर्मा हैट्रिक लगाकर अपनी कुर्सी बचा पाएंगे या सपा नए कुर्मी चेहरे के दम पर इस सीट को दोबारा छीनने में कामयाब होगी?

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बीजेपी का दावा: "डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों के दम पर जीत तय"

वर्तमान बीजेपी विधायक योगेश वर्मा का मानना है कि 2017 के बाद से लखीमपुर सदर क्षेत्र में हुए विकास कार्य उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं.

विकास योजनाएं धरातल पर: योगेश वर्मा के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जन कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर ईमानदारी से उतारा गया है.

2017 से पहले बनाम बाद का आकलन: उनका दावा है कि जनता 2017 से पहले और बाद के विकास का आकलन कर खुद फैसला करेगी और उसी के आधार पर 2027 में बीजेपी की जीत सुनिश्चित होगी.

सपा का पलटवार

समाजवादी पार्टी इस सीट को वापस पाने के लिए रणनीतिक तैयारी में जुटी है.

लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक वोट: सपा नेताओं का कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को लखीमपुर सदर क्षेत्र से ऐतिहासिक बढ़त मिली थी जिससे साबित होता है कि जनता बदलाव चाहती है.

शहरी व ग्रामीण समस्याओं पर घेराबंदी: लखीमपुर सदर का करीब 60% हिस्सा शहरी (नगर पालिका लखीमपुर, खीरी टाउन, वायल टाउन) और 40% ग्रामीण क्षेत्र है. सपा का आरोप है कि बाढ़ प्रभावित ग्रामीण इलाकों और नगर पालिका क्षेत्रों में विधायक ने कोई ठोस काम नहीं किया है.

बूथ स्तर पर तैयारी: पार्टी का दावा है कि बीएलए और बूथ स्तर पर काम पूरा हो चुका है, अब बस एक मजबूत प्रत्याशी के नाम की घोषणा का इंतजार है.

लखीमपुर सदर का जातीय समीकरण

लखीमपुर सदर सीट पर पिछले कई दशकों से कुर्मी समाज का वर्चस्व रहा है. चाहे सपा से पूर्व विधायक डॉ. कौशल किशोर रहे हों, फिर उनके बेटे उत्कर्ष वर्मा, या अब बीजेपी के योगेश वर्मा यह सीट लगातार कुर्मी विधायकों के पास ही रही है.

सीट का अनुमानित जातीय आंकड़ा

मुस्लिम: 90,000

कुर्मी: 80,000

पासी: 35,000

ब्राह्मण: 30,000

जाटव: 15,000

कायस्थ: 12,000

यादव: 11,000

क्षत्रिय, धोबी, लोहार, कुशवाहा, लोनिया: 10,000 (प्रत्येक)

सिख व अन्य जातियां: 25,000 - 30,000

2027 में क्या होगा सियासी दांव?

स्थानीय पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सीट पर मुकाबला कुर्मी चेहरे और निर्णायक वोटों के ध्रुवीकरण पर टिकता है.

निर्णायक भूमिका में ब्राह्मण वोट: बेस वोट बैंक कुर्मी और मुस्लिम मतदाताओं से बनता है. लेकिन 30 हजार की संख्या वाला ब्राह्मण मतदाता जिस दिशा में जाता है, जीत का पलड़ा उसी तरफ झुक जाता है.

सपा का समीकरण: यदि सपा पासी, कुर्मी (वर्मा), मुस्लिम और यादव का मजबूत गठजोड़ बनाकर किसी हैवीवेट कुर्मी प्रत्याशी को मैदान में उतारती है तो वह चुनाव में जोरदार वापसी कर सकती है.

बीजेपी की रणनीति: बीजेपी यहां गैर-यादव और गैर-मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण के साथ-साथ कुर्मी प्रत्याशी के दम पर ही चुनाव जीतती आ रही है.

कुल मिलाकर 2027 के महासमर में दोनों ही दलों को एक मजबूत हैवीवेट कुर्मी प्रत्याशी उतारना होगा. अगर सपा किसी बड़े चेहरे पर दांव लगाती है तो मुकाबला बेहद कांटे का होगा वरना बीजेपी एक बार फिर बाजी मार सकती है.

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