BSP Ashok Siddharth News: बहुजन समाज पार्टी (BSP) में आगामी चुनावी तैयारियों के बीच पार्टी सुप्रीमो मायावती ने बड़ा संगठनात्मक एक्शन लिया है. पूर्व राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता डॉ. अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया गया है. मायावती ने उन पर पार्टी अनुशासन और दिशा-निर्देशों का बार-बार उल्लंघन करने, पार्टी विरोधी गतिविधियों और गुटबाजी में शामिल होने के आरोप लगाए हैं. खास बात यह है कि अशोक सिद्धार्थ को इससे पहले भी मायावती पार्टी से बाहर कर चुकी हैं, लेकिन बाद में उनका निष्कासन वापस ले लिया गया था. 2026 में उन्हें फिर संगठन में जिम्मेदारी दी गई थी. अब एक बार फिर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है. बता दें अशोक सिद्धार्थ, मायावती के भतीजे और BSP के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद के ससुर भी हैं.
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पहले निकाला फिर वापस लिया था फैसला
अशोक सिद्धार्थ के खिलाफ मायावती की यह पहली कार्रवाई नहीं है. इससे पहले भी उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया था. बाद में मायावती ने उनका निष्कासन वापस लेकर उन्हें दोबारा पार्टी में जगह दी थी. इसके बाद साल 2026 में उन्हें संगठन से जुड़ी जिम्मेदारी भी सौंपी गई. हालांकि, अब मायावती ने एक बार फिर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. इस बार पार्टी की ओर से उनके खिलाफ लगातार अनुशासन तोड़ने और संगठन के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने को प्रमुख वजह बताया गया है.
कर्नाटक समेत कई राज्यों की जिम्मेदारी में उठे सवाल
मायावती के मुताबिक अशोक सिद्धार्थ को कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में संगठन की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन वह इन राज्यों में पार्टी के काम को अपेक्षित तरीके से नहीं संभाल पाए. पार्टी की ओर से उन्हें पहले चेतावनी भी दी गई थी. इसके बावजूद सुधार नहीं होने का आरोप है. मायावती ने पहले उनकी सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियां वापस लीं और अब उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी निष्कासित कर दिया गया है. BSP नेतृत्व ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि संगठन में किसी भी तरह की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
मायावती ने वापसी का रास्ता भी किया बंद
इस कार्रवाई में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मायावती ने अशोक सिद्धार्थ की भविष्य में पार्टी में वापसी की संभावना भी खत्म कर दी है. पार्टी की ओर से साफ किया गया है कि अब उन्हें किसी भी परिस्थिति में दोबारा BSP में शामिल नहीं किया जाएगा. यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब पार्टी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और आगामी चुनावों को लेकर संगठन को सक्रिय करने में जुटी है. ऐसे में एक वरिष्ठ नेता के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई को पार्टी के भीतर अनुशासन को लेकर मायावती के सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है.
रणधीर सिंह बेनीवाल पर भी कार्रवाई
मायावती ने केवल अशोक सिद्धार्थ के खिलाफ ही कार्रवाई नहीं की है. रणधीर सिंह बेनीवाल को भी अनुशासनहीनता के आरोप में तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित किया गया है. संगठन में जिम्मेदारियों को लेकर भी कई बदलाव किए गए हैं. पार्टी की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि राज्यों में संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए नेताओं की जिम्मेदारियों में जरूरत के मुताबिक बदलाव किया जाएगा.
राजाराम को मिली तीन राज्यों की अतिरिक्त जिम्मेदारी
अशोक सिद्धार्थ से जिम्मेदारी हटाए जाने के बाद BSP के वरिष्ठ नेता और नेशनल कोऑर्डिनेटर राजाराम को संगठन विस्तार के तहत केरल, गुजरात और कर्नाटक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. राजाराम पहले से मध्य प्रदेश के प्रभारी और नेशनल कोऑर्डिनेटर की भूमिका में हैं. पार्टी की रणनीति के तहत उन्हें इन राज्यों में संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर तालमेल बनाने की जिम्मेदारी दी गई है.
रामजी गौतम को दिल्ली का जिम्मा
BSP के नेशनल कोऑर्डिनेटर रामजी गौतम को दिल्ली में पार्टी संगठन को और अधिक सक्रिय एवं मजबूत करने की विशेष जिम्मेदारी दी गई है. वहीं जानकारी के मुताबिक रामजी गौतम को पंजाब समेत अन्य राज्यों का प्रभारी बनाए रखने का भी फैसला किया गया है. दूसरी ओर रणधीर सिंह बेनीवाल को पंजाब में पार्टी के कामकाज और संगठन की कमान संभालने की जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी सामने आई है. इस तरह पार्टी ने कई राज्यों में प्रभार बदलकर संगठन को नए सिरे से व्यवस्थित करने की कोशिश की है.
नितिन सिंह भी जिम्मेदारियों से मुक्त
मायावती के इस संगठनात्मक फेरबदल की चपेट में अशोक सिद्धार्थ के करीबी माने जाने वाले नितिन सिंह भी आए हैं. उन्हें उनके पिछले संगठनात्मक पदों और जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है. BSP की ओर से यूपी के बाहर जिम्मेदारी निभा रहे उत्तर प्रदेश निवासी वरिष्ठ नेताओं को उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं देने का भी फैसला किया गया है. मायावती ने कार्यकर्ताओं से अफवाहों और कथित साजिशों से सावधान रहने की अपील की है. उन्होंने आरोप लगाया है कि विरोधी दल आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले BSP के अभियान को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में मायावती का यह पूरा संगठनात्मक फैसला पार्टी के भीतर अनुशासन और चुनावी तैयारी को लेकर उनके सख्त रुख का संकेत माना जा रहा है.
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