Mood kya hai Hardoi: साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने हरदोई जिले की सभी 8 की 8 सीटों पर परचम लहराया था. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने 3 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त बनाकर बीजेपी के इस अभेद्य किले में सेंध लगा दी थी. अब सवाल यह है कि 2027 के महासमर से पहले हरदोई का सियासी मिजाज क्या है? क्या बीजेपी अपने इस गढ़ को बचा पाएगी या समाजवादी पार्टी (सपा) बड़ा उलटफेर करेगी? जिले के वरिष्ठ पत्रकारों और सियासी विश्लेषकों की राय के आधार पर पेश है हरदोई की सभी सीटों का एक्सक्लूसिव और ग्राउंड रिपोर्ट विश्लेषण.
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सपा में अंतर्कलह और प्रत्याशी चयन की चुनौतियां
हरदोई की राजनीति पर पैनी नजर रखने वाले वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि समाजवादी पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपना मजबूत संगठन खड़ा करना और सही प्रत्याशियों का चयन करना है. पूर्व जिलाध्यक्ष की बयानबाजी और कार्रवाई के बाद पार्टी का कैडर कुछ हद तक बिखरा हुआ नजर आ रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि सपा को सिर्फ सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित रहने के बजाय सड़कों पर उतरकर जनमुद्दों की लड़ाई लड़नी होगी.
2022 की गलतियों से सीख
विश्लेषकों के अनुसार, 2022 के चुनाव में अखिलेश यादव से टिकट वितरण में कुछ चूक हुई थी. इस बार सपा ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. अगर सपा सही सीटों पर मजबूत जातीय और सामाजिक समीकरण वाले उम्मीदवार उतारती है तो कई सीटों पर मुकाबला बेहद कड़ा हो सकता है.
बीजेपी विधायकों का प्रदर्शन
दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी की सबसे बड़ी ताकत उसका पन्ना प्रमुख स्तर तक का संगठन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चेहरा है. लेकिन इसके बावजूद पार्टी के सामने कई अंदरूनी चुनौतियां भी मौजूद हैं.
विधायकों के खिलाफ नाराजगी: संडीला और कुछ अन्य विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय विधायकों के खिलाफ जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के एक वर्ग में नाराजगी (Anti-incumbency) की खबरें हैं. संडीला और हरदोई सदर जैसे इलाकों में सांसद और विधायकों के बीच आपसी सामंजस्य की कमी और हालिया जातीय तनाव (जैसे पासी बनाम अर्कवंशी विवाद) से बीजेपी के कोर वोट बैंक में बिखराव का खतरा बना हुआ है. वरिष्ठ पत्रकारों के मुताबिक, सपा का माहौल बनने की स्थिति में दो-तीन बीजेपी विधायक या पूर्व प्रत्याशी पाला बदलने की जुगत में भी लगे हुए हैं.
हरदोई की आठों विधानसभा सीटों का ग्राउंड समीकरण
आइए हरदोई जिले की सभी 8 सीटों पर पत्रकारों के आकलन के अनुसार वर्तमान स्थिति और संभावित मुलाकातों/समीकरणों पर नजर डालते हैं.
हरदोई सदर: नितिन अग्रवाल और नरेश अग्रवाल का मजबूत सियासी किला और प्रबंधन काफी मजबूत माना जा रहा है. विपक्ष के पास फिलहाल उनके मुकाबले कोई बड़ा नाम सामने नहीं आया है.
शाहबाद: राज्य मंत्री रजनी तिवारी का पलड़ा भारी दिख रहा है. सपा से आसिफ खान 'बब्बू' के मैदान में रहने से मुकाबला कांटे का हो सकता है.
सवाइजपुर: बीजेपी के मानवेंद्र प्रताप सिंह 'रानू' मजबूत स्थिति में हैं. लेकिन यदि सपा किसी बड़े ब्राह्मण चेहरे पर दांव खेलती है तो समीकरण बदल सकते हैं.
मल्लावां/बिलग्राम: बीजेपी के आशीष सिंह 'आशू' के सामने यदि सपा-कांग्रेस गठबंधन से सुभाष पाल मैदान में उतरते हैं तो यह सीट फंस सकती है.
संडीला: अलका अर्कवंशी का टिकट कटने या क्षेत्र बदलने की चर्चाएं हैं. सपा की ओर से रीता सिंह की दावेदारी इस सीट पर कड़ा मुकाबला पैदा कर सकती है.
गोपामऊ (सुरक्षित): बीजेपी के श्याम प्रकाश अपनी अलग शैली के लिए जाने जाते हैं. सपा अगर पूर्व सांसद उषा वर्मा या उनके परिवार के किसी स्थापित चेहरे को मौका देती है तो कांटे की टक्कर होगी.
सांडी (सुरक्षित): बीजेपी के प्रभाष कुमार का सौम्य स्वभाव उनकी ताकत है, लेकिन सपा की मजबूत रणनीति यहां नतीजे पलट सकती है.
बालामऊ (सुरक्षित): यहां भी जातीय गोलबंदी और प्रत्याशी के व्यक्तिगत व्यवहार का असर सीधा चुनाव नतीजों पर पड़ेगा.
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