यूपी तक के खास शो 'आज का यूपी' में हम राज्य की तीन बड़ी और बेहद महत्वपूर्ण खबरों का विश्लेषण करते हैं. आज की पहली बड़ी खबर मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों से जुड़ी है जहां चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी ने 20,000 से ज्यादा वोट हासिल कर बीजेपी का खेल बिगाड़ दिया है. इस चौंकाने वाले नतीजे ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में सियासी हलचल तेज कर दी है. वहीं दूसरी बड़ी खबर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भीतर जारी घमासान से जुड़ी है जहां मायावती द्वारा वरिष्ठ नेताओं को बार-बार बाहर निकालने और वापस लेने के फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं. तीसरी खबर बीएसपी के भविष्य और आकाश आनंद के रुख से संबंधित है जो चंद्रशेखर के बढ़ते ग्राफ के बीच पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती का सामना कर रहे हैं. आइए इन तीनों खबरों को विस्तार से समझते हैं.
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दतिया में चंद्रशेखर आजाद का किंगमेकर अवतार, बीजेपी को लगा झटका
मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश के राजनीतिक समीक्षकों को चौंका दिया है. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद बीजेपी के गढ़ मानी जाने वाली दतिया सीट पर भारतीय जनता पार्टी पिछड़ गई. हालांकि बीजेपी की इस हार में सबसे बड़ा फैक्टर बने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद रावण.
यादव-दलित समीकरण का जादू: चंद्रशेखर आजाद ने दतिया सीट से दामोदर यादव को अपना उम्मीदवार बनाया था. इस दांव के जरिए उन्होंने न केवल पारंपरिक दलित (जाटव) वोटों में सेंध लगाई बल्कि यादव बिरादरी के वोटों में भी बड़ी हिस्सेदारी हासिल की.
20,000 से ज्यादा वोट बने गेमचेंजर
जब तक चुनाव का अंतिम ऐलान हुआ, आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी ने 21000 के करीब वोट हासिल कर लिए. बीजेपी इस सीट पर 11000 से 12000 वोटों के अंतर से पीछे रही जिससे साफ हो गया कि चंद्रशेखर के प्रत्याशी की मौजूदगी ने ही बीजेपी की हार तय की.
यूपी में 45 सीटों का ऐलान
दतिया के इस प्रदर्शन ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूरे राज्य के राजनीतिक दलों की नींद उड़ा दी है. चंद्रशेखर ने पहले ही यूपी के 45 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. दतिया में 20000+ वोट खींचने की यह ताकत दर्शाती है कि आने वाले यूपी चुनावों में चंद्रशेखर आजाद एक 'दोधारी तलवार' साबित हो सकते हैं.
बीएसपी में फिर 'बहाली और बर्खास्तगी' का खेल
दूसरी तरफ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के अंदरूनी हालात लगातार चिंताजनक बने हुए हैं. दतिया में चंद्रशेखर की सेंधमारी के बीच बसपा सुप्रीमो मायावती के लगातार बदलते फैसले पार्टी कार्यकर्ताओं को असमंजस में डाल रहे हैं.
अशोक सिद्धार्थ का मामला: पार्टी के वरिष्ठ नेता और आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को बार-बार पार्टी से बाहर किया जाना और फिर वापस लेना और फिर बाहर कर देना पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी को उजागर करता है.
फीडबैक सिस्टम पर उठते सवाल: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि या तो बसपा के भीतर का फीडबैक सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है या फिर मायावती के इर्द-गिर्द मौजूद लोग गलत जानकारी दे रहे हैं.
संगठन को नुकसान: पार्टी के पुराने मिशनरी और बामसेफ से जुड़े कार्यकर्ताओं में इस ट्रेंड को लेकर भारी नाराजगी है. जब-तब नेताओं के निष्कासन की इस प्रक्रिया से संगठन लगातार कमजोर हो रहा है जिसका सीधा फायदा चंद्रशेखर आजाद जैसे युवा चेहरों को मिल रहा है.
आकाश आनंद-मायावती का 'सेम पेज' रुख और बसपा के अस्तित्व की चुनौती
आज की तीसरी बड़ी खबर बसपा के भविष्य और उत्तराधिकार से जुड़ी है. जहां एक तरफ चंद्रशेखर आजाद बसपा के कैडर और कोर वोट बैंक (जाटव और मुस्लिम) में लगातार अपनी पैठ मजबूत कर रहे हैं. वहीं मायावती और उनके भतीजे आकाश आनंद अब 'सेम पेज' पर खड़े नजर आ रहे हैं.
हाल ही में आकाश आनंद ने साफ संदेश दिया था कि उनके लिए उनका परिवार नहीं बल्कि 'बहन जी' (मायावती) का फैसला ही सर्वोपरि है. बीएसपी के लिए असल चुनौती यह है कि अगर पार्टी समय रहते अपने संगठन को मजबूत नहीं करती तो बामसेफ और बसपा का पारंपरिक मतदाता पूरी तरह चंद्रशेखर आजाद के पाले में खिसक सकता है.
दतिया उपचुनाव के नतीजे यह चेतावनी दे रहे हैं कि यदि बसपा ने अपनी रणनीति में बदलाव नहीं किया तो उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों में चंद्रशेखर आजाद न केवल बीजेपी और सपा का गणित बिगाड़ेंगे बल्कि बसपा के सियासी आधार को भी बड़ा नुकसान पहुंचाएंगे.
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