दर्द से चींखती रही महिला लेकिन नहीं मिला सरकारी अस्पताल में एक बेड, आधी रात को तड़पते हुए सड़क पर हुई डिलीवरी

शामली के जिला अस्पताल में कथित लापरवाही के चलते गर्भवती महिला ने अस्पताल के मेन गेट पर ही सड़क किनारे बच्चे को जन्म दे दिया. घटना के बाद भारतीय किसान यूनियन ने प्रदर्शन किया और स्वास्थ्य विभाग ने जांच कमेटी गठित कर दी है.

शरद मलिक

• 01:05 PM • 11 Apr 2026

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Shamli Hospital Negligence: क्या हो अगर जिस देश में डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता हो, वही भगवान जरूरत पड़ने पर आपसे मुंह मोड़ लें. आप भगवान माने जाने वाले डॉक्टर का दरवाजा खटखटाते रहें और डॉक्टर दरवाजा ही न खोलें. ऐसा ही कुछ हुआ है उत्तर प्रदेश के शामली में जहां एक गर्भवती महिला ने तड़प-तड़प कर सड़क किनारे अस्पताल के मेन गेट पर ही नवजात शिशु को जन्म दे दिया. आरोप है कि महिला को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया, जिसके चलते उसे भयंकर पीड़ा के बीच खुले में ही बच्चे को जन्म देना पड़ा. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे देखकर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं. यह मामला सामने आने के बाद भारतीय किसान यूनियन ने प्रदर्शन जमकर प्रदर्शन किया और हॉस्पिटल प्रशासन के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की. 

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क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, यह मामला सरकारी जिला अस्पताल का है,जहां शुक्रवार देर रात महिला के घर वाले उसे डिलीवरी के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे थे. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर वहां के स्टाफ ने बेड और डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं कहकर महिला को भर्ती करने से मना कर दिया. इस दौरान महिला का दर्द बढ़ गया और उसकी हालत बिगड़ गई, जिसके बाद वह अस्पताल के मेन गेट पर ही गिर पड़ी. महिला का ऐसा हाल देखकर वहां मौजूद कुछ औरतों ने मानवीयता दिखाते हुए चादर लगाकर अस्थायी व्यवस्था की और सड़क किनारे ही महिला की डिलीवरी करवाई. नवजात के रोने की आवाज के साथ ही मौके पर मौजूद लोगों में आक्रोश फैल गया.

इस घटना के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया और हॉस्पिटल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए. परिजनों का कहना है कि महिला दर्द से तड़प रही थी और वे लगातार मदद के लिए हॉस्पिटल का दरवाजा पीट रहे थे लेकिन अंदर बैठे बड़े साहब का कोई फोन तक नहीं उठा और न ही किसी ने दरवाजा खोला.

भारतीय किसान यूनियन ने किया प्रदर्शन

जैसे ही इस घटना की जानकारी भारतीय किसान यूनियन (BKU) को मिली, वैसे ही वहां के सैकड़ों कार्यकर्ता और समर्थक मौके पर पहुंच गए. इसके बाद उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय का घेराव करते हुए जमकर हंगामा किया. प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सीएमओ को उनके ही कार्यालय में घेर लिया और लापरवाही बरतने वाले चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को तत्काल सस्पेंड करने की मांग की. यही नहीं भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि अगर दोषियों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे फिर से एक बड़ा आंदोलन करेंगे.

सीएमओ ने मांगा 3 दिन का समय

यह पूरा मामला सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी अनिल कुमार ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की. उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कर्मचारियों को सस्पेंड करने का अधिकार उनके पास नहीं है. उनके अनुसार यह कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों और खास तौर पर सहारनपुर के डायरेक्टर की ओर से की जाएगी.

सीएमओ ने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तीन दिन का समय मांगा. वहीं भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने उन्हें तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में कार्रवाई नहीं हुई तो वे फिर से धरना और प्रदर्शन करेंगे.

जांच कमेटी हुई गठित

इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच कमेटी गठित कर दी गई है. बताया जा रहा है कि जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों और लखनऊ मुख्यालय को भेजी जाएगी. अस्पताल प्रशासन फिलहाल बचाव की स्थिति में है और पूरे मामले की जांच के बाद ही कार्रवाई की बात कही जा रही है.

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