UGC के नए नियम के खिलाफ सवर्ण आर्मी लेकर दिल्ली पहुंच गए श्रावस्ती के ठाकुर शिवम सिंह, भारी बवाल

UGC Controversy Thakur Shivam Singh: दिल्ली में UGC के नए 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026' नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. ठाकुर शिवम सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी बारिश और पुलिस पाबंदियों के बावजूद UGC कार्यालय के बाहर डटे हुए हैं और नियम को 'काला कानून' बताते हुए इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

गौरव कुमार पांडेय

27 Jan 2026 (अपडेटेड: 27 Jan 2026, 04:04 PM)

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UGC Protest Latest Updates: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर इस समय सोशल मीडिया से लेकर उत्तर प्रदेश और देश के अलग-अलग हिस्सों में बवाल मचा हुआ है. इस बीच दिल्ली में यूजीसी के दफ्तर के सामने विरोध प्रदर्शन हो रहा है. इसी प्रदर्शन में यूपी से दिल्ली पहुंची 'सवर्ण आर्मी' भी है जिसने मोर्चा खोल रखा है. बारिश और पुलिस की पाबंदियों के बावजूद सवर्ण समाज के लोग यूजीसी दफ्तर के बाहर डटे हुए हैं. यहां नीचे देखिए ग्राउंड जीरो से यूपी Tak की ये खास रिपोर्ट.

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आपको बता दें कि यूजीसी के 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026' के खिलाफ सवर्ण समाज का गुस्सा सातवें आसमान पर है. सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय महासचिव ठाकुर शिवम सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी दिल्ली स्थित यूजीसी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए हैं. ठाकुर शिवम सिंह यूपी के श्रावस्ती के रहने वाले हैं. प्रदर्शन के दौरान भारी बारिश के बावजूद सवर्ण आर्मी के नेताओं ने कड़े तेवर दिखाए. ठाकुर शिवम सिंह ने आरोप लगाया कि प्रशासन उन्हें रोकने की कोशिश कर रहा है. कई समर्थकों को बॉर्डर पर ही रोक दिया गया, जिसके बाद वे छुपते-छुपाते मेट्रो और रिक्शा के जरिए दफ्तर तक पहुंचे हैं.  

उन्होंने यूजीसी के नए नियमों की तुलना ब्रिटिश काल के 'रॉलेट एक्ट' से की और कहा कि यह कानून समाज में भेदभाव मिटाने नहीं, बल्कि बढ़ाने की साजिश है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चाहे उन पर लाठियां बरसें या आंसू गैस के गोले छोड़े जाएं, वे तब तक यहाँ से नहीं हिलेंगे जब तक यह 'काला कानून' वापस नहीं लिया जाता. 

बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे का भी समर्थन

प्रदर्शनकारियों ने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे का भी समर्थन किया. उन्होंने दावा किया कि अग्निहोत्री ने सरकार के गलत नियमों के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके कारण उन पर दबाव बनाकर जबरन इस्तीफा लिया गया है.  सवर्ण आर्मी का मुख्य विरोध इस बात पर है कि नए बिल में सामान्य वर्ग का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है. उनका मानना है कि आरोपी की पहचान छुपाना और एकतरफा जांच करना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. 

यहां नीचे दिए गए वीडियो में समझिए कि यूजीसी के इस नए बिल में क्या है और इसे लेकर सामान्य वर्ग को क्या आपत्ति है.

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