UP Weather Update: उत्तर प्रदेश में इस साल मॉनसून की बारिश को लेकर मौसम विभाग ने दीर्घकालिक पूर्वानुमान जारी कर दिया है. विभाग के मुताबिक, साल 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से कम रहने की प्रबल संभावना है. यानी इस बार खेतों को तरबतर करने वाली वैसी झमाझम बारिश की उम्मीद कम है, जैसी हर साल होती है.
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क्यों रूठ सकते हैं बादल?
मौसम विभाग ने इस कम बारिश के पीछे तीन मुख्य वैज्ञानिक कारण बताए हैं:
- सबसे बड़ा कारण अल नीनो को माना जा रहा है. वर्तमान में जो स्थितियां बारिश के अनुकूल थीं, वे बदल रही हैं. अप्रैल से जून के बीच प्रशांत महासागर में अल नीनो जैसी स्थितियां विकसित हो सकती हैं. विज्ञान के अनुसार, जब अल नीनो सक्रिय होता है, तो भारत (खासकर उत्तर प्रदेश) में मॉनसून कमजोर पड़ जाता है और बारिश कम होती है.
- उत्तरी गोलार्द्ध और यूरेशिया में सर्दियों और वसंत के दौरान बर्फबारी सामान्य से थोड़ी कम रही है. इसका सीधा असर मॉनसून की हवाओं की ताकत पर पड़ता है.
- हालांकि हिंद महासागर में सकारात्मक IOD की स्थिति बन रही है जो बारिश में मदद करती है, लेकिन इस बार अल नीनो का नकारात्मक प्रभाव उस पर भारी पड़ता दिख रहा है.
खेती-किसानी पर क्या होगा असर?
उत्तर प्रदेश की कृषि काफी हद तक मॉनसूनी बारिश पर निर्भर है. सामान्य से कम बारिश की संभावना को देखते हुए किसानों को अपनी सिंचाई व्यवस्था और फसलों के चयन को लेकर अभी से सतर्क रहने की जरूरत है. सिंचाई के वैकल्पिक साधनों (जैसे नलकूप) पर निर्भरता बढ़ सकती है.
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