उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर मिल रही ओवरबिलिंग की शिकायतों का कड़ा संज्ञान लिया है. गुरुवार को ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उपभोक्ताओं की शिकायतों की गहन जांच के लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए. उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि उपभोक्ता की कोई गलती नहीं है, तो किसी भी कीमत पर उसका बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाना चाहिए.
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उपभोक्ता विश्वास और पारदर्शिता सर्वोपरि
मुख्यमंत्री ने कहा कि आम उपभोक्ता स्वाभाविक रूप से ईमानदार होता है और सही बिल मिलने पर वह समय से भुगतान करता है. उन्होंने बिजली बिलिंग और भुगतान प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए. ऊर्जा मंत्री और पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक (MD) को खुद फील्ड में जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने और टॉल फ्री हेल्पलाइन नंबरों को पूरी तरह सक्रिय रखने को कहा गया है ताकि उपभोक्ताओं की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके.
बिजली उपभोक्ताओं में 126% की भारी वृद्धि
बैठक में आंकड़ों के जरिए बताया गया कि वर्ष 2017 में प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 1.65 करोड़ थी, जो 2026 में बढ़कर 3.71 करोड़ से अधिक हो गई है. यह लगभग 126 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है. इसी तरह विद्युत भार में 80 प्रतिशत और ऊर्जा बिक्री में 63 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. मुख्यमंत्री ने डिस्कॉम्स (विद्युत वितरण कंपनियों) के प्रदर्शन में सुधार पर संतोष जताया लेकिन राष्ट्रीय रेटिंग में और सुधार लाने के निर्देश भी दिए.
उत्पादन क्षमता और सौर ऊर्जा पर जोर
भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तापीय इकाइयों को पूर्ण क्षमता के साथ संचालित करने और नई परियोजनाओं (मेजा, ओबरा-डी, अनपरा-ई) के समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए. उन्होंने बताया कि घाटमपुर की 660 मेगावाट की नई इकाई इसी अप्रैल माह से परिचालन शुरू कर देगी. इसके अलावा, ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के तहत 4.60 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर लगाए जा चुके हैं, जिसे और विस्तार देने की योजना है.
संवेदनशीलता के साथ हो विजिलेंस की कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने बिजली चोरी रोकने के लिए होने वाली विजिलेंस की कार्रवाई में संवेदनशीलता बरतने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि चेकिंग के दौरान ऐसी कोई कार्रवाई न हो जिससे आम आदमी या ईमानदार उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़े. साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम 5 आवास वाले मजरों के विद्युतीकरण और जर्जर बिजली लाइनों को चरणबद्ध तरीके से भूमिगत करने की प्रक्रिया को गति देने के निर्देश दिए.
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