उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों IAS समीर वर्मा नाम की चर्चा है. चर्चा काम को लेकर नहीं, बल्कि 2002 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी समीर वर्मा पिछले 6 महीने से लापता बताए जा रहे हैं. उन्होंने सरकार द्वारा दी गई नई पोस्टिंग पर जॉइन नहीं किया है, जिसे शासन ने बेहद गंभीरता से लिया है. अब खबर है कि अनुशासन तोड़ने के आरोप में उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जा सकता है. समीर वर्मा इन दिनों चर्चा के केंद्र में हैं. आइए खबर में आपको बताते हैं कौन हैं वो?
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कौन हैं समीर वर्मा?
समीर वर्मा उत्तर प्रदेश कैडर के 2002 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. मूल रूप से मध्य प्रदेश के रहने वाले समीर का जन्म 21 सितंबर 1972 को हुआ था. उन्होंने मैथ्स से ग्रेजुएशन किया है और साथ ही LLB की पढ़ाई भी की है. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, वह सितंबर 2002 में आईएएस बने थे और 2004 में उनकी सेवाएं स्थायी की गई थीं. वर्तमान में वह सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी हैं.
कैसे हुई विवाद की शुरुआत?
समीर वर्मा के लापता होने की कहानी जून 2025 से शुरू होती है. उस समय वह आईजी स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात थे, जहां से उन्हें हटा दिया गया था. इसके बाद अक्टूबर 2025 में सरकार ने उन्हें सचिव, नियोजन विभाग के पद पर नई जिम्मेदारी दी. लेकिन हैरानी की बात यह है कि समीर वर्मा ने इस नई कुर्सी पर बैठने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और न ही दफ्तर पहुंचे.
स्टडी लीव वाली क्या है कहानी?
बताया जा रहा है कि आईजी स्टाम्प पद से हटने के बाद समीर वर्मा MBA की पढ़ाई करना चाहते थे, जिसके लिए उन्होंने स्टडी लीव मांगी थी. हालांकि, शासन ने उनकी इस अर्जी को खारिज कर दिया था. इसके बावजूद उन्होंने नियमों की परवाह नहीं की और बिना अनुमति के ही गायब हो गए. अक्टूबर 2025 से अब तक उनकी कोई खबर नहीं है. बिना इजाजत इतने लंबे समय तक गायब रहना सीधे तौर पर अनुशासनहीनता है, इसलिए अब शासन उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर चुका है और जल्द ही उन पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है.
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