UP News: नोएडा हिंसा मामले को लेकर पुलिस की जांच तेज हो गई है. श्रमिक प्रदर्शन में हुई हिंसा को लेकर अभी तक पुलिस ने 300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है. अब मामले की जांच में जो सामने आया है, उससे पूरी कहानी ही पटल गई है.
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नोएडा पुलिस की जांच में सामने आया है कि जिस वीडियो को शेयर किया गया और श्रमिकों के बीच अफवाह और डर फैलाया गया, वह वीडियो नोएडा का था ही नहीं. जांच में बड़ी साजिश की बात सामने आई है. इसी के साथ पुलिस के निशाने पर कई सोशल मीडिया हैंडल्स भी हैं. जिन सोशल मीडिया हैंडल्स का जिक्र नोएडा पुलिस की एफआईआर में है, उनमें डां. कंचना यादव और प्रियंका भारती का भी नाम है. बता दें कि ये दोनों आरजेडी से जुड़ी हुईं हैं.
वीडियो को लेकर क्या पता चला?
दरअसल, 14 अप्रैल 2026 को फेसबुक और एक्स पर कई सोशल मीडिया हैंडल्स से एक वीडियो तेजी से वायरल किया गया. इस वीडियो के साथ दावा किया गया कि यह वीडियो नोएडा का है, जहां कर्मचारी हड़ताल पर हैं और पुलिस उनके साथ मारपीट कर रही है.
कुछ पोस्ट में हालात बेहद खराब बताए गए और लोगों को भड़काने की भी कोशिश की गई. जांच में प्रियंका भारती, डां. कंचना यादव और जितेन्द्र कुमार दौसा समेत कुछ अन्य यूजर्स के नाम भी सामने आए. इन लोगों ने इन वीडियो को अलग-अलग कैप्शन के साथ शेयर किया.
वीडियो की निकली ये सच्चाई
जब पुलिस ने इस वायरल वीडियो की सच्चाई खंगाली, तो पूरा मामला ही पलट गया. जांच में पता चला कि यह वीडियो नोएडा का नहीं, बल्कि 11 अप्रैल 2026 का मध्य प्रदेश के शहडोल और रीवा इलाके का है. वहां एक व्यक्ति नशे की हालत में हंगामा कर रहा था, जिसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया गया था. उसी वीडियो को नोएडा की घटना बता दिया गया.
पुलिस जांच में सामने आया है कि वीडियो को जानकर गलत जानकारी के साथ शेयर किया गया, जिससे लोगों में डर और गुस्सा फैलाया जा सके. इस फर्जी वीडियो का असर भी तुरंत देखने को मिला. नोएडा के अलग-अलग इलाकों में अफवाह फैल गई और लोगों के बीच असुरक्षा का माहौल बन गया. इसके बाद बड़े स्तर पर श्रमिकों के प्रदर्शन में हिंसा के मामले देखने को मिले.
साजिश के पीछे कौन-कौन?
हालात को संभालने के लिए पुलिस को तुरंत एक्टिव होना पड़ा और लोगों को सही जानकारी देकर स्थिति को सामान्य किया गया. पुलिस का कहना है कि यह कोई साधारण गलती नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है. आरोपियों ने भड़काऊ और झूठी जानकारी फैलाकर समाज में अशांति फैलाने और प्रशासन के खिलाफ अविश्वास पैदा करने की कोशिश की. यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस साजिश के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं.
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