मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एलान किया है कि बेसिक शिक्षा परिषद के तहत आने वाले सभी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को बिना किसी भेदभाव के मुफ्त यूनिफॉर्म, जूते, मोजे और स्वेटर दिए जाएंगे. मुख्यमंत्री ने साफ किया कि इस मुहिम का मकसद हर गरीब और जरूरतमंद बच्चे तक शिक्षा की बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है.
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साल 2017 के पुराने दिनों को याद करते हुए भावुक अंदाज में कहा, "मुझे याद है जब 2017 में हमारी सरकार आई, तब उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली ज्यादातर बेटियां नंगे पैर स्कूल जाती थीं. रास्ता पथरीला हो, कड़ाके की ठंड हो या तपती धूप, वे मासूम पैर सब बर्दाश्त करते थे. तभी हमने तय किया कि अब ऐसा नहीं होगा."
सीएम ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान से प्रेरणा लेकर इस योजना की शुरुआत की गई थी, ताकि समाज के हर वर्ग के बच्चे को बराबरी का हक मिल सके.
स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में आई कमी
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई बीच में न छूटे, इसके लिए स्कूलों में पीने के साफ पानी और लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग टॉयलेट्स की व्यवस्था भी की गई है. सरकार इन बुनियादी सुविधाओं को हर स्कूल तक पहुंचाने के अपने लक्ष्य को हासिल कर चुकी है.
बेटियों और महिलाओं के हक में लिए कई बड़े फैसले
- पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद: 'मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना' के जरिए बेटियों को जन्म से लेकर ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है.
- दहेज मुक्त सामूहिक विवाह: 'मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना' के तहत अब तक 5 लाख से ज्यादा बेटियों की शादियां कराई जा चुकी हैं. सरकार हर बेटी की शादी के लिए 1 लाख रुपये की राशि देती है, ताकि कोई बेटियों का सौदा न कर सके.
- रोजगार और पुलिस में भागीदारी: यूपी में कामकाजी महिलाओं का दायरा 12% से बढ़कर अब 36% से ऊपर निकल गया है. साथ ही, यूपी पुलिस बल में महिलाओं के लिए 20% आरक्षण अनिवार्य कर दिया गया है.
घर की असली मालकिन बन रहीं महिलाएं
नारी गरिमा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि आज प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाले ज्यादातर घरों का मालिकाना हक महिलाओं को दिया जा रहा है. इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में 'घरौनी' (स्वामित्व योजना) के तहत घर की सबसे बुजुर्ग महिला सदस्य के नाम पर ही सरकारी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं.
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