यूपी को मिलने जा रहा एक और चमचमाता 4-लेन कॉरिडोर, इन जिलों को आपस में जोड़ेगा नया रास्ता

मथुरा से बरेली तक बन रहे 265 किलोमीटर लंबे NH-530B हाईवे का निर्माण तेजी से चल रहा है. परियोजना के मथुरा क्षेत्र के पैकेज 1B और 1C तैयार होकर यातायात के लिए खुल चुके हैं, जबकि पूरे प्रोजेक्ट को नवंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है.

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आयशा शेख़

• 08:38 PM • 12 Jun 2026

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Mathura-Bareilly Highway: धार्मिक नगरी मथुरा, वृंदावन और पूरे ब्रज क्षेत्र की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है. केंद्र सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत मथुरा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-530B) का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. इस हाईवे के बनने से न सिर्फ ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि सफर का समय भी काफी कम हो जाएगा.

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देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों को आधुनिक सड़कों से जोड़ा जा रहा है. काशी, अयोध्या और विंध्याचल के बाद अब इस कड़ी में ब्रज भूमि का नाम भी जुड़ गया है. ये पूरा प्रोजेक्ट (मथुरा से बरेली तक) अभी पूरी तरह नहीं बना है, लेकिन इसका मथुरा वाला हिस्सा (पैकेज 1B और 1C) बनकर तैयार हो चुका है और वहां ट्रैफिक भी शुरू हो गया है.

मथुरा से शुरू होकर हाथरस, कासगंज, बदायूं होते हुए बरेली तक जाने वाले इस पूरे 265 किलोमीटर लंबे हाईवे (NH-530B) के बाकी हिस्सों पर काम अभी तेजी से चल रहा है. एनएचएआई के मुताबिक, इस पूरी परियोजना को अंतिम रूप से पूरा करने का लक्ष्य नवंबर 2027 तक रखा गया है.

प्रोजेक्ट की दो बड़ी कड़ियां

पैकेज 1B (मथुरा से गाजू गांव)

  • लंबाई और लागत: लगभग 33 किलोमीटर लंबा यह हिस्सा ₹1,858 करोड़ की लागत से 'हाइब्रिड एन्युटी मोड' पर बना है.

इस रूट पर ट्रैफिक को आसान बनाने के लिए 2 बड़े पुल, 9 छोटे पुल और स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए 11 अंडरपास (VUP) बनाए गए हैं. साथ ही रेलवे ट्रैक को पार करने के लिए एक रोड ओवर ब्रिज (ROB) और दो एलिवेटेड वायाडक्ट भी तैयार किए गए हैं.

पैकेज 1C (गाजू गांव से देवीनगर बायपास)

  • लंबाई और लागत: 33 किलोमीटर से ज्यादा लंबे इस हिस्से को ₹1,523 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है.

इसमें 2 मुख्य पुल, 6 छोटे पुल, 8 वाहन अंडरपास और 2 वायाडक्ट बनाए गए हैं, जो कनेक्टिविटी को मजबूत करते हैं.

भारी भरकम जाम से मिली आजादी

पहले दिल्ली या राजस्थान से आकर बरेली और पीलीभीत जाने वाली गाड़ियां मथुरा शहर के बीच से होकर गुजरती थीं, जिससे शहर में भारी जाम लगता था. लेकिन अब यह नया हाईवे शहर के बाहर से होकर निकल रहा है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि आगरा, ग्वालियर, हाथरस या कासगंज जाने वाले लोग अब राया और हाथरस जैसी जगहों के भारी जाम में फंसे बिना सीधे बाहर से बाहर निकल जाते हैं.

क्या है इस प्रोजेक्ट में खास?

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के पैकेज 1B और 1C का निर्माण पूरा हो चुका है. यह नया 4-लेन कॉरिडोर मथुरा और आस-पास के इलाकों में गाड़ियों की आवाजाही को बेहद आसान बनाएगा. हाईवे को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए इसमें कई खास सुविधाएं जोड़ी गई हैं... 

  • शहर के भीतर ट्रैफिक जाम न लगे, इसके लिए बड़े पुल, रेलवे ओवर ब्रिज (ROB), एलिवेटेड वायडक्ट और अंडरपास बनाए गए हैं.
  • पर्यावरण का ध्यान रखते हुए पूरे हाईवे पर सोलर लाइटें लगाई गई हैं और पानी की कमी को दूर करने के लिए रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किया गया है.
  • सड़क हादसों को रोकने और सफर को सुरक्षित बनाने के लिए एडवांस सेफ्टी फीचर्स का इस्तेमाल हुआ है.

श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को बड़ा फायदा

मथुरा और वृंदावन में सालभर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. इस 4-लेन कॉरिडोर के शुरू होने से मथुरा शहर में बाहर से आने-जाने वाले ट्रैफिक को एक नया और सुव्यवस्थित रास्ता मिल गया है. इससे स्थानीय लोगों को रोज-रोज के जाम से राहत मिलेगी और पर्यटकों का समय भी बचेगा.

35 साल से खेती कर रहे स्थानीय किसानों का कहना है कि पहले गाड़ियां जाम में फंसी रहती थीं और फसलें समय पर मंडी नहीं पहुंच पाती थीं. अब डेढ़ घंटे का रास्ता छोटा हो गया है. किसान अपने दूध, सब्जी और फसलों को बिना देरी किए बड़ी मंडियों तक पहुंचा पा रहे हैं, जिससे उनकी कमाई बढ़ी है.