UP Hydrogen Bus: उत्तर प्रदेश में बढ़ते प्रदूषण को रोकने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. राज्य में अब डीजल बसों की जगह पर्यावरण के अनुकूल हाइड्रोजन बसें चलाई जाएंगी. भविष्य के इस क्लीन और ग्रीन ट्रांसपोर्ट मॉडल की शुरुआत गाजियाबाद से होने जा रही है. इस नई पहल से न सिर्फ प्रदूषण कम होगा, बल्कि हवा भी साफ होगी.
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- 42 सीटों की क्षमता: इस प्रोजेक्ट के तहत चलने वाली हर एक हाइड्रोजन बस में 42 यात्रियों के बैठने की सुविधा होगी.
- लंबा सफर, नो टेंशन: ये बसें बेहद पावरफुल होंगी. एक बार फुल टैंक होने पर यह बस बिना रुके 750 किलोमीटर तक का लंबा सफर तय कर सकेगी.
प्रदूषण से मुक्ति, पैदा होगी ऑक्सीजन
बसें पूरी तरह जीरो-एमिशन (शून्य कार्बन उत्सर्जन) पर काम करती हैं. जहां डीजल बसें धुआं और जहरीली गैसें छोड़ती हैं, वहीं ये हाइड्रोजन बसें पर्यावरण को साफ रखने में मदद करेंगी. दावा है कि इन बसों के चलने से प्रदूषण तो घटेगा ही, साथ ही इनसे प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन भी होगा.
क्यों खास है यह बदलाव?
उत्तर प्रदेश तेजी से अपने ट्रांसपोर्ट सिस्टम को अपग्रेड कर रहा है. गाजियाबाद से शुरू हो रहा यह हाइड्रोजन बस प्रोजेक्ट राज्य को देश के उन चुनिंदा हिस्सों में खड़ा कर देगा जो पूरी तरह से ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ रहे हैं.
परिवहन विभाग के सूत्रों के मुताबिक, गाजियाबाद में इसके सफल ट्रायल के बाद राज्य के अन्य बड़े शहरों जैसे लखनऊ, कानपुर और वाराणसी में भी इस मॉडल को लागू करने की योजना है. इस कदम से यूपी में न सिर्फ यात्रियों का सफर आधुनिक होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सांस लेने के लिए साफ हवा भी मिल सकेगी.
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