'जिहादियों तुम्हारी कब्र करने का टाइम आ गया...' तिहाड़ जेल से बाहर आए Ex-मुस्लिम सलीम का ये अंदाज हिला देगा!

गाजियाबाद के लोनी से गिरफ्तार हुआ उम्रकैद का दोषी सलीम वास्तविक तिहाड़ जेल से जमानत पर बाहर आ गया है. डासना मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद ने उसे शेर बताया. जानिए 1995 के संदीप बंसल हत्याकांड का पूरा सच.

Ex Muslim Salim Wastik

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यूपी तक

• 12:54 PM • 12 Jun 2026

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दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा और 31 साल पुराने अपहरण व हत्याकांड का सजायाफ्ता दोषी सलीम वास्तिक एक बार फिर भयानक सुर्खियों में है. तिहाड़ जेल से जमानत पर बाहर आते ही सलीम वास्तिक के बैक टू बैक कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. जेल से निकलते ही जहां उसने एक वीडियो जारी कर खुलेआम चैलेंज किया, वहीं अब वह गाजियाबाद के चर्चित डासना देवी मंदिर पहुंचा है. डासना मंदिर के पीठाधीश्वर महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के साथ उसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब तहलका मचा रहा है, जिसमें महंत उसे 'मां का शेर और महादेव का बच्चा' बताते नजर आ रहे हैं.

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डासना मंदिर के महंत बोले- 'सलीम भाई मौत को हराकर बाहर आया है'

तिहाड़ जेल से जमानत मिलने के बाद सलीम वास्तिक गाजियाबाद के शिव शक्ति धाम डासना देवी मंदिर पहुंचा. वहां के पीठाधीश्वर महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने उसका स्वागत किया और कैमरे के सामने आकर कहा, "हमारे शेर हमारे भाई सलीम वास्तिक आज मां के और महादेव के चरणों में हैं. शेर मौत को हराकर, सारे षड्यंत्रों को हराकर आज फिर जेल से बाहर है और अब फिर से पूरी मानवता के लिए लड़ने के लिए तैयार है. दुनिया में कोई भी सलीम भाई का साथ छोड़ दे, लेकिन शिव शक्ति धाम डासना के लोग कभी इनका साथ नहीं छोड़ेंगे. हिंदुओं, एक दूसरे का साथ निभाना जिस दिन तुम सीख लोगे, तुम्हें कोई पराजित नहीं कर सकता."

जेल से निकलते ही सलीम ने दिया खुला चैलेंज

इससे पहले तिहाड़ जेल से बाहर आते ही सलीम वास्तिक का एक और वीडियो सुर्खियों में आया था, जिसमें वह उग्र लहजे में सीधे तौर पर चुनौती देता नजर आया. वीडियो में सलीम वास्तिक ने कहा, "हां भाई जिहादियों, जगह देख लो कौन सी है. तिहाड़ के बाहर की... तुम्हारा डेली बाहर आ गया है. जिहादियों अब तैयार हो जाओ, अब तुम्हारी कब्र करने का टाइम आ गया है. तुम जैसे लोगों का जो इस्लाम है ना, वो खत्म करूंगा मैं. मैं मुसलमानों को पढ़ाई-लिखाई और तरक्की की तरफ लेकर जाऊंगा, उस रास्ते से हटाऊंगा जो मुसलमानों को खराब कर रहे हैं. उखाड़ सको तो आ जाना, मेरा खुला चैलेंज है."

क्या है 31 साल पुराना वो मामला, जिसमें पहचान छिपाकर रह रहा था सलीम?

इस पूरे मामले की कहानी बेहद चौंकाने वाली है. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के दस्तावेजों के मुताबिक, सलीम वास्तिक असल में सलीम खान है, जो पिछले 25 सालों से अपनी पहचान बदलकर गाजियाबाद के लोनी में फरारी काट रहा था. 20 जनवरी 1995 को दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके से 13 साल के बच्चे संदीप बंसल का अपहरण किया गया था. फिरौती न मिलने पर बच्चे की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी.

साल 1997 में अदालत ने इस मामले में सलीम खान (अब सलीम वास्तिक ) को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. साल 2000 में वह जेल से जमानत पर बाहर आया और उसके बाद फर्जी दस्तावेज बनाकर, पहचान बदलकर फरार हो गया. वह लगातार सलीम खान से सलीम वास्तिक बनकर पुलिस को छका रहा था.

ऑफिस में जानलेवा हमले के बाद खुला था राज

सलीम वास्तिक की फरारी का अंत तब हुआ जब इसी साल 27 फरवरी 2026 को गाजियाबाद के लोनी स्थित उसके ऑफिस में घुसकर नकाबपोश बदमाशों ने उस पर चाकू से जानलेवा हमला किया था. इस हमले के बाद पुलिस एनकाउंटर में दो आरोपी जीशान और गुलफाम ढेर हो गए थे. गंभीर हालत में अस्पताल में इलाज कराने के बाद जब सलीम वास्तिक 1 महीने बाद ठीक होकर घर लौटा, तो मामला सोशल मीडिया पर भयानक वायरल हो गया. इसके बाद जब दिल्ली क्राइम ब्रांच ने दस्तावेजों को खंगाला तो खुलासा हुआ कि यह वही सलीम खान है जो 25 साल से नाम बदलकर फरार चल रहा था. क्राइम ब्रांच ने उसे लोनी से गिरफ्तार कर जेल भेजा था, लेकिन अब 10 जून 2026 को वह एक बार फिर तिहाड़ जेल से जमानत पर बाहर आ चुका है.