कौन हैं पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर? सरकार ने समय से पहले किया रिटायर तो अटकी ग्रेच्युटी, अब SC ने सुनाया नया फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के खिलाफ लंबित चार अनुशासनात्मक मामलों को छह महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को दिया है.

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यूपी तक

• 07:28 PM • 12 Jun 2026

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Ex IPS Amitabh Thakur Case: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वे पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर के खिलाफ लंबित सभी चार अनुशासनात्मक कार्यवाहियों को 6 महीने के भीतर पूरा करें.

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1992 बैच के यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी ठाकुर को गृह मंत्रालय ने 23 मार्च 2021 को नियमों के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दे दी थी. सरकार का मानना था कि कई विभागीय जांचों और शिकायतों के बाद वे जनहित में सेवा में बने रहने के योग्य नहीं हैं. अगर ऐसा नहीं होता, तो वे साल 2028 तक अपनी सेवाएं देते.

क्या है पूरा मामला?

अमिताभ ठाकुर का आरोप है कि उनके खिलाफ चल रही कार्यवाहियों को जानबूझकर पिछले 10 सालों से खींचा जा रहा है, जबकि वे सभी कारण बताओ नोटिस का जवाब दे चुके हैं. इसी वजह से उनकी ग्रेच्युटी के 10 लाख रुपये समेत रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले अन्य फंड रुके हुए हैं.

उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि इन मामलों को 3 महीने में निपटाया जाए, जिसके बाद कोर्ट ने सरकारों को 6 महीने का वक्त दिया है.

कोर्ट में किसने क्या कहा?

जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की.

  • यूपी सरकार का पक्ष: राज्य सरकार की वकील रुचिरा गोयल ने कोर्ट को बताया कि फिलहाल अमिताभ ठाकुर के खिलाफ चार अनुशासनात्मक कार्यवाहियां लंबित हैं.
  • अमिताभ ठाकुर की मांग: उन्होंने कोर्ट से अपील की थी कि इन जांचों को तीन महीने के भीतर पूरा करने का आदेश दिया जाए.
  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला: कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे इस पूरी प्रक्रिया को छह महीने के भीतर निपटाएं.

कौन हैं अमिताभ ठाकुर? 

अमिताभ ठाकुर 1992 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी हैं. अगर वे सेवा में रहते, तो साल 2028 में रिटायर होते. केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने 23 मार्च 2021 को नियमों का हवाला देते हुए उन्हें समय से पहले ही अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी थी. सरकार का मानना था कि कई विभागीय जांच और शिकायतों के बाद वे जनहित में सेवा में बने रहने के "योग्य नहीं" हैं.

विवादों से पुराना नाता

चर्चित विवाद (2015): साल 2015 में वे तब देश भर की सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने समाजवादी पार्टी के तत्कालीन प्रमुख मुलायम सिंह यादव पर धमकी देने का आरोप लगाया था. उन्होंने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की थी, जिसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था.