SIT Investigate Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों में आने वाले चढ़ावे की रकम के कथित चोरी के मामले को उत्तर प्रदेश शासन ने बेहद गंभीरता से लिया है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के विशेष अनुरोध पर एक्शन लेते हुए राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन कर दिया है. सरकार ने SIT को सख्त निर्देश देते हुए महज 7 दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने को कहा है. इस बीच एसओजी की टीम ने एक संदिग्ध लवकुश नाम के युवक को हिरासत में लेकर कैश भी बरामद किया है.
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लखनऊ के मंडलायुक्त करेंगे SIT की अगुवाई
दान चोरी के इस हाई-प्रोफाइल प्रकरण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए सरकार ने बेहद कड़े और सीनियर अधिकारियों की तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है. लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत को इस एसआईटी का अध्यक्ष नामित किया गया है. आईजी रेंज आईपीएस किरन एस को समिति में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है. मामले में वित्तीय अनियमितताओं की बारीक जांच के लिए विशेष सचिव नील रतन को भी एसआईटी का सदस्य नियुक्त किया गया है. यह उच्च स्तरीय समिति दान चोरी के पूरे प्रकरण की तह तक जाकर सभी तकनीकी और भौतिक तथ्यों की बारीकी से जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी.
SOG की रडार पर कर्मचारी
इस कथित गबन मामले की जांच की कमान संभाल रही एसओजी की टीम ने अपनी रडार पर कई संदिग्धों को लिया है. मंदिर के चढ़ावे और दान की काउंटिंग से जुड़े कई कर्मचारी इस वक्त जांच एजेंसियों के घेरे में हैं. जांच के दौरान एसओजी टीम ने रुदौली के शुजागंज क्षेत्र मीनापुर फगौली के रहने वाले लवकुश नाम के एक युवक को हिरासत में लिया है. सूत्रों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए युवक से की गई कड़ाई से पूछताछ के बाद पुलिस ने कुछ कैश भी बरामद किए हैं.
CCTV फुटेज बना जांच का सबसे बड़ा हथियार
मंदिर परिसर और काउंटिंग रूम के भीतर लगे तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को जांच एजेंसी ने अपना सबसे अहम आधार बनाया है. कई दिनों के फुटेज को खंगाला जा रहा है ताकि यह साफ हो सके कि दानपात्रों से रकम निकालने या गायब करने के खेल में कौन-कौन शामिल था. इसके अलावा अन्य तकनीकी और साइंटिफिक साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा रही है.
माना जा रहा है कि हिरासत में लिए गए युवक और संदिग्ध कर्मचारियों से पूछताछ के बाद इस रैकेट से जुड़े कई अन्य चेहरों की भूमिका भी सामने आ सकती है. हालांकि, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अभी तक पुलिस, जिला प्रशासन या राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
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