राम मंदिर चढ़ावा चोरी: अब 5 साल के ऑडिट की दोबारा जांच करेगी SIT, नौकरियों में रिश्वतखोरी का भी सनसनीखेज खुलासा, रडार पर बड़े पदाधिकारी

Ram Mandir Latest Update: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच तेज हो गई है. SIT अब ट्रस्ट के 5 साल के ऑडिट, कथित रिश्वतखोरी, अवैध भर्तियों, कमीशनखोरी और बेनामी संपत्तियों की जांच करेगी. 15 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपने की नई समय-सीमा तय हुई है.

Ram Mandir Latest Update

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आशीष श्रीवास्तव

• 10:42 AM • 02 Jul 2026

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Ram Mandir Latest Update: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब एक बेहद बड़े घोटाले का रूप लेता जा रहा है. मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) को शुरुआती तफ्तीश में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं. ऐसे में अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पिछले 5 वर्षों के ऑडिट का दोबारा ऑडिट कराने का फैसला लिया गया है. इस जांच की जद में ट्रस्ट के कई बड़े पदाधिकारी भी आ सकते हैं. इसी बीच शासन ने SIT को रिपोर्ट सौंपने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय देते हुए नई समय-सीमा 15 जुलाई तय कर दी है. जांच में न सिर्फ चढ़ावा चोरी बल्कि मंदिर में नौकरियों के नाम पर बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी और निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी का भी हैरान करने वाला खेल सामने आया है.

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चंपत राय और अनिल मिश्रा समेत बड़े पदाधिकारी जांच के दायरे में

SIT को मिले अहम साक्ष्यों के बाद अब ट्रस्ट के निर्माण कार्यों और कथित कमीशनखोरी के आरोपों की परतें खोली जा रही हैं. सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर को दान में मिले सोने-चांदी के जेवरात का अब तक कोई प्रॉपर ऑडिट ही नहीं हुआ था जिससे ट्रस्ट की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है.

इस पूरी वित्तीय गड़बड़ी को लेकर डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव और चंपत राय की भूमिका भी अब सीधे तौर पर जांच के दायरे में आ गई है. पूछताछ के दौरान अनिल मिश्रा ने पूरी जिम्मेदारी टिन्नू यादव नामक व्यक्ति पर डालते हुए खुद को बेकसूर बताया है. हालांकि उन्होंने माना कि उनसे निगरानी में बड़ी चूक हुई है.

रामराज्य कोष संदूक, क्यूआर कोड और छापेमारी में मिली नकदी

पुलिस और SIT की टीमों ने गिरफ्तार आरोपियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है. मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के कमरे से पुलिस को रामराज्य कोष लिखा एक संदिग्ध संदूक और एक फर्जी क्यूआर कोड मिला है जिसकी गंभीरता से जांच की जा रही है. लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय के घरों पर हुई छापेमारी में भारी मात्रा में नकदी, जेवरात और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए हैं.

नया सनसनीखेज मोड़

गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ला से हुई कड़ाई से पूछताछ ने इस मामले में एक नया मोड़ ला दिया है. सूत्रों के अनुसार, अयोध्या पुलिस अब राम मंदिर में पदों पर की गई भर्तियों में बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी की जांच कर रही है. आरोप है कि राम मंदिर प्रतिष्ठान के विभिन्न पदों पर लगभग 125 कर्मचारियों की अवैध भर्ती की गई. इन उम्मीदवारों से नौकरी लगवाने के नाम पर मोटी रकम वसूली गई थी.

रिकॉर्ड्स की छानबीन के दौरान पुलिस को इन भर्ती किए गए लोगों के लिए न तो कोई आधिकारिक नियुक्ति पत्र मिले न ही कोई औपचारिक सेवा अनुबंध या रोजगार से जुड़े अन्य दस्तावेज मिले। इससे साफ है कि मंदिर में नियुक्तियों की आड़ में एक बड़ा संगठित रैकेट चल रहा था.

ट्रस्ट सदस्य के रिश्तेदारों की भूमिका और बेनामी संपत्ति की जांच

जांचकर्ताओं ने उन सभी संदिग्ध 125 कर्मचारियों की सूची जब्त कर ली है और उनके रोजगार रिकॉर्ड की स्क्रूटनी की जा रही है. इस अवैध भर्ती प्रक्रिया के तार सीधे ट्रस्ट के एक रसूखदार सदस्य से जुड़ रहे हैं, जिनके निर्देश पर ये नियुक्तियां की गईं. SIT अब उन सभी संदिग्धों, कर्मचारियों और बिचौलियों के बैंक खातों को खंगाल रही है ताकि बैंकिंग चैनलों के जरिए पैसे के लेनदेन का पता लगाया जा सके.

रडार पर आए ट्रस्ट के उस सदस्य की निजी संपत्तियों की भी जांच शुरू कर दी गई है. यह देखा जा रहा है कि ट्रस्ट से जुड़ने के बाद उनकी संपत्ति में कोई अनुपातहीन वृद्धि तो नहीं हुई और क्या यह पैसा दान के गबन या नियुक्तियों के अवैध नेटवर्क से आया है.

न्यायिक हिरासत में बंद आरोपी अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा भी भर्ती प्रक्रिया में अपनी कथित भूमिका के लिए जांच के दायरे में आ गए हैं. सूत्रों का कहना है कि दोनों आरोपी ट्रस्ट के ही एक सदस्य के करीबी रिश्तेदार हैं और इन्होंने ही इस पूरी साठगांठ को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी.