Shamli News: शामली के आयुष मलिक के धर्म परिवर्तन का मामला अखबारों की सुर्ख़ियों में फिर से आ गया है. 25 साल की चांदनी कुरैशी से प्यार के बाद आयुष ने धर्म परिवर्तन कर लिया था. मुस्लिम मजहब में आने के बाद आयुष ने अपना नाम मोहम्मद अली कर लिया था. आरोप लगा कि चांदनी ने दबाव बनाया जिसके बाद आयुष मुस्लिम बन गया. मगर अब आयुष मलिक ने वापस हिंदू धर्म में घर वापसी कर ली है. आयुष की इस वापसी के बाद शामली के भैंसवाल गांव में खाप चौधरियों की एक अहम पंचायत हुई. 'यूपी Tak' की ग्राउंड रिपोर्ट में खाप चौधरियों और गांव के बुजुर्गों ने इस पूरे मामले पर खुलकर अपनी बात रखी और बताया कि समाज इस घर वापसी को किस तरह देख रहा है.
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'समाज का दबाव भी था...'
पंचायत में मौजूद खाप चौधरी बाबा शोकेंद्र सिंह से जब आयुष की घर वापसी पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि आयुष ने जो किया, वह बिल्कुल ठीक किया. उन्होंने कहा, "इस मामले में काफी दिनों से प्रयास चल रहा था और सभी लोग लगे हुए थे. समाज का भी उस पर थोड़ा दबाव था और उसे समझाया-बुझाया भी गया. अपने बच्चों के लिए कभी थोड़ा सख्त तो कभी नरम होना पड़ता है. अब मामला सफल हो गया है."
चौधरी शोकेंद्र ने आगे कहा कि अपनी बिरादरी और अपने घर में ही सब चीजें अच्छी लगती हैं. दूसरी बिरादरी या धर्म में जाने से आने वाले समय में बच्चों की शादियों और सामाजिक तालमेल में बहुत बड़ी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं. आयुष ने वापस आकर अच्छा किया, हमारा आशीर्वाद उसके साथ है.
क्या किसी डर या दबाव में है आयुष?
आयुष का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह मंदिर के सामने घंटी बजाते और पूजा-पाठ करते दिख रहा था. कुछ ग्रामीणों का मानना है कि वीडियो में आयुष का चेहरा थोड़ा सहमा हुआ लग रहा था और वह खुलकर नहीं बोल पा रहा था.
इस पर बात करते हुए कपिल पवार ने कहा, "मुसलमान बनना और अब वापस आना, दोनों ही उसके अपने फैसले थे. वह अपने परिवार के बीच आ गया है, यह अच्छी बात है. वीडियो में चेहरा देखकर थोड़ा डर या दिखावा लग सकता है, लेकिन आगे चलकर सब साफ हो जाएगा."
वहीं उन्होंने इस आशंका को खारिज करते हुए कहा, "कोई डर नहीं है. वह कुछ दिन दूसरे माहौल में रहकर आया है, इसलिए अभी थोड़ा दबा-दबा सा महसूस कर रहा है. वह शर्मा रहा है, 10-5 दिन में बिल्कुल खुल जाएगा. उसने समझदारी का काम किया है और अपने मां-बाप, बहन और रिश्तेदारों के बारे में सोचकर ही यह कदम उठाया है."
'बिरादरी का मान-सम्मान बच गया'
गांव के बुजुर्ग राम गोपाल ने कहा कि आयुष के वापस आने से पूरी बिरादरी का मान-सम्मान बच गया है, नहीं तो आगे चलकर बहुत दिक्कतें पैदा हो जातीं. वहीं श्याम सिंह ने कहा कि हिंदू धर्म में उसकी वापसी से पूरा समाज खुश है. एक अन्य ग्रामीण ने कहा कि आयुष ने वापस आकर बड़े-बुजुर्गों का मान रख लिया है, वरना आगे स्थिति और भी ज्यादा गलत हो सकती थी.
'पश्चिम यूपी में समाज ऐसे मामलों को स्वीकार नहीं करता'
दक्षिण भारत और उत्तर भारत के सामाजिक माहौल की तुलना करते हुए बाबा शोकेंद्र ने कहा कि सरकारों ने कानून बना रखे हैं और पुलिस प्रोटेक्शन भी मिल जाती है, लेकिन नेताओं और कानून बनाने वालों को समाज के बारे में भी सोचना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया:
"दक्षिण भारत में क्या होता है, वह अलग बात है, लेकिन हमारे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस तरह के धर्म परिवर्तन को समाज में बिल्कुल भी मान्यता नहीं है. यहाँ ऐसे काम को बहुत ही घृणा (नफरत) की नजर से देखा जाता है."
चौधरियों का साफ मानना है कि धर्म बदलने या दूसरी जगह शादी करने से समाज में व्यक्ति की वैल्यू पूरी तरह खत्म हो जाती है. आयुष ने समय रहते अपनी गलती सुधार ली है, इसलिए पूरा समाज इस फैसले का स्वागत कर रहा है.
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