Ghaziabad Zaid Murder: गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर के मुस्तफाबाद में मामूली बात पर हुए जैद हत्याकांड ने अब एक बेहद दर्दनाक रूप ले लिया है. सात बेटियों के बाद बुढ़ापे का एकमात्र सहारा बने 18 साल के जैद की मौत से पूरे परिवार में कोहराम मचा है. वारदात के बाद जैद की मां का जो बयान सामने आया है वह किसी के भी रोंगटे खड़े कर दे. बिलखती मां ने रोते हुए बताया कि उनके मासूम बेटे ने कातिलों के सामने हाथ जोड़े थे, गिड़गिड़ाया था, अपना मोबाइल और 700 रुपये तक उन्हें सौंप दिए थे. लेकिन बेरहम कातिलों का दिल फिर भी नहीं पसीजा. मां ने उत्तर प्रदेश सरकार से इंसाफ की गुहार लगाते हुए आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने और कातिलों को फांसी देने की मांग की है.
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मैं नहाने जा रहा हूं...ये कहकर निकला था जैद
भावुक मां ने बताया कि जैद घर से बेहद खुश होकर निकला था. उसने घर पर कहा था 'मैं स्विमिंग पूल में नहाने जा रहा हूं.' परिजनों ने उसे रोकना भी चाहा और कहा कि रुक जाओ, पेप्सी पी लो और थोड़ी देर बाद चले जाना. लेकिन वह दोपहर करीब 1:30 से 2:00 बजे के बीच अपने दोस्तों के साथ निकल गया. उसे क्या मालूम था कि वह जिस रास्ते पर जा रहा है, वहां मौत उसका इंतजार कर रही है.
मां की जुबानी... कैसे शुरू हुआ खूनी खेल
जैद की मां ने रोते हुए बताया कि 'मेरा बेटा बाइक पर था और पीछे मोहल्ले के ही दो छोटे बच्चे बैठे थे. पुल क्रॉस करते समय कार से हल्की सी रगड़ लग गई. कार सवारों ने उतरते ही पहले तो तीनों बच्चों को सरेराह चांटे मारे. फिर मेरे बेटे से बाइक की चाबी छीन ली और गाड़ी साइड में लगाकर बोले 'आजा, चाबी ले जा. जब जैद चाबी लेने गया तो उन्होंने उसे घसीटकर अपनी कार में डाल लिया.'
"₹700 और मोबाइल भी दे दिया पर मेरे बाबू को नहीं छोड़ा"
मां का आरोप है कि आरोपी जैद को अगवा कर मनीष प्रॉपर्टीज के दफ्तर के अंदर ले गए. वहां उसे बेरहमी से पीटा गया. 'दफ्तर के अंदर मेरे बच्चे ने हाथ भी जोड़े. वह गिड़गिड़ाया कि मुझे मत मारो, मुझे छोड़ दो, मैं अपने घर जा रहा हूं. उसने जेब में रखे ₹700 और अपना मोबाइल भी कातिलों को दे दिया कि यह सब ले लो पर मुझे छोड़ दो..., लेकिन उन जालिमों ने मेरे बाबू को नहीं छोड़ा. लात-घूंसों से उसे इतना मारा कि वह वहीं ढेर हो गया. जब वह नहीं उठा तो कातिलों ने दोस्तों को धमकाकर कहा कि इसे गाड़ी पर लादो और कॉलोनी ले जाओ, पुलिस या किसी के आगे जिक्र मत करना.'
"मैंने कल सुबह से अपने लाल का चेहरा तक नहीं देखा"
जब जैद को अस्पताल ले जाया गया तब उसकी मां रिश्तेदारी में पुश्ते की तरफ गई हुई थी. पड़ोसियों ने जैद को बेसुध हालत में देखा तो अस्पताल भागे. मां ने रोते हुए बताया 'पड़ोसियों ने उसके मुंह में पानी डाला तो पानी निकल गया. उसके हाथ-पैर पूरे नीले पड़ चुके थे. मैं तो कल सुबह की अपने बच्चे को देखी हुई हूं, मुझे तो अपने लाल का आखिरी बार चेहरा देखना भी नसीब नहीं हुआ. मेरा घर उजड़ गया, अब उसके बिना घर का काम कैसे चलेगा?'
"कातिलों को मिले फांसी, घर पर चले बुलडोजर"
प्रशासनिक कार्रवाई से असंतुष्ट मां ने रोते हुए कहा कि 'मुझे सिर्फ इंसाफ चाहिए. जैसे मेरे बच्चे का खून करा, वैसे ही मेरी आंखों को इंसाफ चाहिए. जैसे दुनिया के गुनहगारों के घरों को उठा दिया जाता है (बुलडोजर चलाया जाता है), वैसे ही उनके घरों पर भी बुलडोजर चलना चाहिए. उन्होंने मेरे बेटे की जान ली है, मैं चाहती हूं कि मेरे बच्चे के कातिलों को फांसी दी जाए.'
इस पूरे मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी राहुल समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज कर लिया है. लेकिन पीड़ित मां के इन दर्दनाक आंसुओं ने गाजियाबाद पुलिस और कानून-व्यवस्था के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पूरा मुस्तफाबाद इलाका इस समय गम और गुस्से में डूबा हुआ है.
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