राम मंदिर चढ़ावा चोरी में घिरे चंपत राय ने तीन घंटे की पूछताछ में किए कई बड़े खुलासे

Champat Rai about Ram Mandir Chori: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पूर्व महासचिव चंपत राय से तीन घंटे पूछताछ हुई. जांच में बैंक खातों, नियुक्तियों और आरोपी लवकुश मिश्रा की करोड़ों की संपत्ति पर फोकस है. जानिए अब तक जांच में सामने आए बड़े खुलासे.

Champat Rai about Ram Mandir Chori

Champat Rai about Ram Mandir Chori

मयंक शुक्ला

• 04:02 PM • 30 Jun 2026

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Champat Rai about Ram Mandir Chori: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच की आंच अब सीधे ट्रस्ट के शीर्ष स्तर तक पहुंच गई है. बीते सोमवार को यानी 29 जून को जांच टीम ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से करीब 3 घंटे तक बेहद तीखे सवाल-जवाब किए. सूत्रों के मुताबिक, इस पूछताछ में चंपत राय कई प्रशासनिक फैसलों और नियुक्तियों को लेकर घिर गए और कई सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए. वहीं दूसरी ओर इस चोरी के पैसों से बनाई जा रही अकूत संपत्ति का पहला बड़ा सबूत भी सामने आया है. मामले के आठ नामजद आरोपियों में से एक लवकुश मिश्रा द्वारा अयोध्या के सबसे पॉश इलाके में बनाए जा रहे करोड़ों के आलीशान मकान का भंडाफोड़ हुआ है जिसे चोरी के पैसों से खरीदे जाने का गहरा शक है.

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शुरुआती क्लीन चिट से 3 घंटे की पूछताछ तक

चढ़ावा चोरी के इस मामले में सबसे ज्यादा सवाल चंपत राय की भूमिका पर ही उठ रहे हैं क्योंकि शुरुआती दौर में उन्होंने ही मंदिर में किसी भी तरह की गड़बड़ी या हेरफेर से साफ इनकार कर दिया था. हालांकि बाद में 79 लाख रुपये की भारी बरामदगी और सबूतों के सामने आने पर पूरा परिदृश्य बदल गया.

जांच टीम ने चंपत राय से मुख्य रूप से प्रशासनिक निर्णयों, चढ़ावा प्रबंधन, कर्मचारियों की जवाबदेही और पूर्व में मिली शिकायतों के निस्तारण से जुड़े बिंदुओं पर पूछताछ की.

अकेले जिम्मेदारी लेने से किया इनकार

जब पुलिस ने सवाल उठाया कि आखिर बिना किसी उचित बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के करीबियों और रिश्तेदारों को मंदिर के संवेदनशील विभागों में कैसे नौकरियां दी गईं? इस पर चंपत राय ने खुद का बचाव करते हुए कहा कि नियुक्तियों में वे अकेले शामिल नहीं थे बल्कि ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भी इसमें बराबर की भूमिका थी.

पूर्व ड्राइवर टिन्नू यादव पर क्या बोले चंपत राय

चंपत राय ने पुलिस को बताया कि जैसे ही उन्हें इस हेरफेर की पुख्ता जानकारी मिली उन्होंने तुरंत एक्शन लेते हुए एफआईआर दर्ज कराई. अपने पूर्व ड्राइवर और मुख्य आरोपी टिन्नू यादव को लेकर उन्होंने दोहराया कि वह लंबे समय से उनके साथ था. लेकिन उसने ऐसा गलत काम किया इसकी उन्हें कतई उम्मीद नहीं थी.

SBI मैनेजर से पूछताछ और बैंक स्टेटमेंट्स खंगालने की तैयारी

चोरी की कड़ियों को आपस में जोड़ने के लिए पुलिस ने अब बैंकिंग चैनल्स पर शिकंजा कसा है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के मैनेजर से पुलिस टीम ने इस मामले में विस्तृत पूछताछ की है. सभी आठ नामजद आरोपियों के बैंक अकाउंट स्टेटमेंट्स खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि चोरी का पैसा किस फॉर्म (कैश या ट्रांसफर) में आगे बढ़ा, कहां जमा हुआ और उसे कहां इन्वेस्ट किया गया.

इस महाघोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस ने 70 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है और लगभग 140 गवाहों के बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया तेजी से जारी है.

अयोध्या के वीवीआईपी एरिया में मिला आरोपी लवकुश का 'सीक्रेट' मकान

इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आया जब ग्राउंड जीरो पर पहुंची मीडिया टीम ने आरोपी लवकुश मिश्रा की गुप्त संपत्ति का पता लगाया. अयोध्या के सबसे महंगे रिहाइशी इलाकों में गिने जाने वाले सहदतगंज में लवकुश मिश्रा का एक आलीशान मकान बन रहा है. करीब 1000 स्क्वायर फीट में फैले इस मकान के स्ट्रक्चर का काम लगभग पूरा हो चुका है और सिर्फ खिड़की-दरवाजे लगने बाकी हैं. यह पूरी करोड़ों की प्रॉपर्टी लवकुश ने अपनी पत्नी के नाम पर दर्ज करा रखी है.

पड़ोसी राजकुमार पांडे का बड़ा खुलासा 

'यह मकान लवकुश मिश्रा का ही है. पिछले साल ठंड के महीनों में इस जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी और इसी साल फरवरी के आखिरी सप्ताह से यहां निर्माण कार्य तेजी से शुरू हुआ. हमें बस इतना पता था कि लवकुश राम मंदिर में ड्यूटी करता है. जब अखबारों और मीडिया में गबन और चोरी के मामले में उसकी फोटो छपी, तब हमें समझ आया कि वह इस बड़े कांड में फंसा हुआ है. उसके पिता गाजियाबाद में पल्लेदारी (बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन लेबर) का काम करते थे. ऐसे में अचानक अयोध्या के वीवीआईपी इलाके में करोड़ों की जमीन खरीदकर मकान बनाना सीधे तौर पर शक के दायरे में आता है.'

एक तरफ जहां चंपत राय और अनिल मिश्रा जैसे बड़े पदाधिकारी चौतरफा दबाव के बाद अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं. वहीं दूसरी तरफ आरोपियों के घरों से मिल रहे प्रॉपर्टी के दस्तावेज यह साफ कर रहे हैं कि राम मंदिर के पवित्र चढ़ावे पर यह डाका कोई एक-दो दिन की छोटी चोरी नहीं बल्कि महीनों से चल रहा एक संगठित और बड़ा सिंडिकेट था. फिलहाल सभी आठ आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं और बैंक खातों की फॉरेंसिक जांच के बाद कई और सफेदपोश चेहरों के बेनकाब होने की पूरी उम्मीद है.