Gomti River: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की शान और प्रदेश की लाइफलाइन मानी जाने वाली गोमती नदी को लेकर योगी सरकार ने एक बहुत बड़ा और सराहनीय फैसला लिया है. जिस गोमती नदी के आंचल में सदियों से हमारी सभ्यता फल-फूल रही है, अब उसके उद्गम स्थल की किस्मत बदलने वाली है.
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सरकार ने पीलीभीत जिले में स्थित गोमती के इस पावन उद्गम स्थल को एक वर्ल्ड-क्लास टूरिज्म और आध्यात्मिक डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की पूरी तैयारी कर ली है. पर्यटन विभाग ने इस बेहद खास प्रोजेक्ट के लिए 1.04 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को मंजूरी दे दी है.
इतना ही नहीं, काम को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए पहली किस्त के रूप में 78 लाख रुपये जारी भी कर दिए गए हैं. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद पीलीभीत का यह इलाका न सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से चमकेगा, बल्कि प्रकृति से प्यार करने वाले पर्यटकों के लिए भी एक पसंदीदा ठिकाना बन जाएगा.
पीलीभीत की 'फुलहर झील' से शुरू होता है सफर
गोमती नदी पीलीभीत जिले की कलीनगर तहसील के माधोटांडा गांव के पास स्थित 'गोमत ताल' से निकलती है, जिसे पहले फुलहर झील के नाम से जाना जाता था.
मानव सभ्यता हमेशा नदियों के किनारे ही फली-फूली है. गोमती नदी यूपी की जीवनरेखा और हमारी सांस्कृतिक धरोहर है.
नदी पीलीभीत से निकलकर शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर और जौनपुर जैसे कई जिलों को सींचते हुए करीब 960 किलोमीटर का लंबा सफर तय करती है.
इसके बाद गाजीपुर जिले में जाकर यह पवित्र गंगा नदी में मिल जाती है. सोचिए, जो नदी करोड़ों लोगों की प्यास बुझाती है और किसानों के खेतों को हरा-भरा रखती है, उसके जन्मस्थान को अब वो सम्मान मिलने जा रहा है जिसका वह हकदार था.
क्या-क्या बदलेगा इस पावन स्थल पर?
इस प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी 'उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम' (UPSTDC) को सौंपी गई है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं और सैलानियों की सहूलियत के लिए आधुनिक सुविधाएं तैयार की जा रही हैं.
- एक बड़ा मल्टीपर्पज हॉल बनाया जाएगा, जहां सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन हो सकेंगे.
- आधुनिक टॉयलेट ब्लॉक और पर्यटकों के रुकने के लिए विजिटर शेड का निर्माण होगा.
- पैदल चलने के लिए सुंदर इंटरलोकिंग पाथवे और चारों तरफ खूबसूरत गार्डन विकसित किए जाएंगे.
- पूरे परिसर को चमकाने के लिए लाइटिंग और सोलर पावर से चलने वाली सुविधाएं लगाई जाएंगी.
गोमती नदी का वो इतिहास, जो बहुत कम लोग जानते हैं
सनातन परंपरा में गोमती नदी का दर्जा बेहद खास और पूजनीय है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लंका विजय के बाद भगवान श्री राम ने गोमती नदी में ही डुबकी लगाकर स्नान किया था. 33 करोड़ देवी-देवताओं की तपोभूमि माना जाने वाला पवित्र तीर्थ 'नैमिषारण्य' भी इसी गोमती नदी के किनारे बसा हुआ है.
जब हम लखनऊ में गोमती के घटते जलस्तर या प्रदूषण की खबरें देखते हैं, तो दिल थोड़ा उदास हो जाता है. ऐसे में सरकार का यह कदम उम्मीद की एक नई किरण जगाता है. गोमती के उद्गम स्थल को सहेजना सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों और प्रकृति को बचाने की एक बेहद भावुक और जरूरी कोशिश है. उम्मीद है कि यह पवित्र स्थल जल्द ही वैश्विक पर्यटन के नक्शे पर अपनी अमिट पहचान बनाएगा.
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