यूपी के लोगों को मिलेगा ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज, सरकार ने शुरू की नई योजना

केंद्र सरकार की पीएम राहत योजना के तहत सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को पहले 7 दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा. योजना में गोल्डन आवर के दौरान तुरंत इलाज, डिजिटल क्लेम सिस्टम, गुड समैरिटन सुरक्षा और हिट एंड रन मामलों में सरकारी भुगतान का प्रावधान है.

UP Tak

आयशा शेख़

30 Jun 2026 (अपडेटेड: 30 Jun 2026, 03:33 PM)

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PM Rahat Yojana: उत्तर प्रदेश की व्यस्त सड़कों और एक्सप्रेस-वे पर सफर करने वाले करोड़ों मुसाफिरों के लिए राहत भरी खबर है. सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को रोकने और घायलों को तुरंत डॉक्टरी मदद पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक मानवीय योजना शुरू की है. 

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इस नई योजना का नाम है- 'पीएम राहत' (PM Road Accident Victim Hospitalization and Assured Treatment). इस योजना का फायदा देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश को भी मिलेगा, जहां आए दिन होने वाले सड़क हादसों में समय पर इलाज न मिलने के कारण कई परिवार बिखर जाते हैं.

हादसे के बाद शुरुआती एक घंटा, जिसे डॉक्टर 'गोल्डन आवर' कहते हैं, बेहद कीमती होता है. इस एक घंटे के भीतर अगर सही इलाज मिल जाए, तो किसी की भी जान बचाई जा सकती है. लेकिन पैसों की तंगी, अस्पतालों की लंबी कागजी कार्रवाई या फिर पुलिस के डर से लोग घायलों की मदद करने से कतराते थे. 

सरकार ने साफ कर दिया है कि "पैसों की कमी या कानूनी पचड़ों के कारण अब किसी भी सड़क दुर्घटना पीड़ित के इलाज में देरी या इनकार नहीं किया जा सकेगा."

1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज

  • इस योजना के तहत, मोटर वाहन दुर्घटना में घायल होने वाला कोई भी व्यक्ति बिना कोई पैसा दिए तुरंत इलाज पा सकता है.
  • हादसे के बाद पहले 7 दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज पूरी तरह मुफ्त दिया जाएगा.
  • योजना सड़क का इस्तेमाल करने वाले सभी नागरिकों के लिए है, चाहे वह पैदल चलने वाला राहगीर हो, वाहन चालक हो या फिर गाड़ी में बैठा सह-यात्री.

पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य

नरेंद्र मोदी जी की नीतिगत दिशा और नितिन गडकरी जी के संकल्प के तहत इस पहल का उद्देश्य दुर्घटना के बाद की चिकित्सा प्रक्रिया को न केवल सरल बनाना है, बल्कि पूरी तरह मानवीय बनाना भी है, क्योंकि हर एक जीवन कीमती है.

डिजिटल नेटवर्क से जुड़ेगा यूपी

इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए एक डिजिटल इकोसिस्टम तैयार किया गया है, जिसमें पुलिस, स्वास्थ्य सेवाएं, बीमा कंपनियां और परिवहन विभाग एक साथ मिलकर काम करेंगे:

हादसे के वक्त क्या करें?

दुर्घटना होने पर तुरंत 112 नंबर पर कॉल करना होगा. कॉल आते ही घायल को पास के किसी भी आयुष्मान भारत योजना से जुड़े या नामित अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस भेजी जाएगी.

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर सीधे इलाज शुरू कर देंगे. मरीज के परिवार से कोई एडवांस पैसा या डिपॉजिट नहीं मांगा जाएगा. अगर नजदीकी अस्पताल इस योजना में शामिल नहीं भी है, तो भी उसे मरीज की हालत स्थिर करने के लिए मुफ्त आपातकालीन उपचार देना ही होगा.

बैकग्राउंड में काम करेगी e-DAR तकनीक

जब डॉक्टर मरीज की जान बचाने में जुटे होंगे, तब पुलिस ई-डार पोर्टल पर डिजिटल रूप से पुष्टि करेगी कि यह एक सड़क हादसा है. गैर-जानलेवा मामलों में 24 घंटे और जानलेवा मामलों में 48 घंटे के भीतर पुलिस को यह पुष्टि करनी होगी. इसके बाद अस्पताल एक यूनिक 'रोगी उपचार आईडी' बनाकर सीधे TMS 2.0 पोर्टल पर क्लेम दर्ज कर देगा.

'हिट एंड रन' मामलों में सरकार देगी पैसा

अगर गाड़ी का बीमा है, तो इलाज का खर्च बीमा कंपनियां संभालेंगी. वहीं, बिना बीमा वाले वाहनों या फिर 'हिट एंड रन' के मामलों में इलाज का पूरा खर्च सरकार खुद उठाएगी.

उत्तर प्रदेश में अब किसी भी घायल की मदद करने वाले नेक नागरिक को पुलिस या कोर्ट-कचहरी के चक्कर नहीं काटने होंगे.  योजना के तहत उन्हें पूरी कानूनी सुरक्षा दी गई है. न तो कोई उनका उत्पीड़न कर सकता है और न ही कोई पूछताछ के लिए दबाव बना सकता है.

यूपी के हर जिले में तैनात होंगे शिकायत अधिकारी

योजना को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, जो जिला सड़क सुरक्षा समिति का हिस्सा होंगे.

यदि कोई अस्पताल इलाज करने से मना करता है या पुलिस की तरफ से कोई देरी होती है, तो नागरिक सीधे इस शिकायत निवारण अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं. अगर वहां भी संतोषजनक समाधान नहीं मिलता, तो सीधे जिला कलेक्टर यानी डीएम से भी शिकायत की जा सकती है. अब उत्तर प्रदेश की सड़कों पर कोई भी घायल इलाज के इंतजार में दम नहीं तोड़ेगा, क्योंकि पीएम राहत योजना के साथ अब 'इलाज सबसे पहले' आएगा.