VB-G RAM G: केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार को लेकर देश में एक बहुत बड़ा बदलाव करने जा रही है, जिसका फायदा यूपी के गांवों को भी मिलने वाला है. अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य गांव में रहकर मजदूरी करता है, तो अब जेब में पहले से कहीं ज्यादा पैसे आने वाले हैं.
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केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से पूरे देश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी नया ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून यानी विकसित भारत - गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025 (VB-G RAM G) लागू होने जा रहा है. मनरेगा की जगह लेने वाले इस नए कानून के तहत यूपी के मजदूरों की दिहाड़ी में 15 से 25 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी की गई है.
अब 100 नहीं, पूरे 125 दिन मिलेगा गारंटीड काम
इस नए कानून में सरकार ने रोजगार के दिनों को बढ़ा दिया है. अब तक जहां मनरेगा के तहत साल में सिर्फ 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलती थी, वहीं अब इस नए ग्रामीण रोजगार ढांचे के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी. यानी अब काम के दिन बढ़ने से ग्रामीणों की सालाना आमदनी में बड़ा इजाफा तय है.
15% से 25% तक बढ़ेगी दिहाड़ी
सरकार ने इस योजना को इस तरह से डिजाइन किया है कि जिन राज्यों में पहले मजदूरी दरें काफी कम थीं, उन्हें सबसे ज्यादा फायदा मिले. उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्य इसी श्रेणी में आते हैं, जहां अब मजदूरी में 15 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जाएगी.
न्यूनतम बेस रेट तय: पहले देश के कई हिस्सों में मजदूरी दर महज 241 रुपये प्रतिदिन तक थी, लेकिन अब सरकार ने एक अंतरिम बेस वेज रेट तय कर दिया है, जिसके तहत किसी भी मजदूर को 300 रुपये प्रतिदिन से कम मजदूरी नहीं दी जाएगी.
राष्ट्रीय औसत में बढ़ोतरी: पूरे देश की बात करें तो राष्ट्रीय औसत मजदूरी अब मनरेगा के 298.8 रुपये से बढ़कर 327.4 रुपये प्रतिदिन हो गई है, जो कि सीधे तौर पर लगभग 10% से ज्यादा की बढ़ोतरी है.
किस राज्य में सबसे ज्यादा मजदूरी?
जहां यूपी-बिहार जैसे राज्यों में बड़ी बढ़ोतरी हुई है, वहीं हरियाणा में यह दर 409 रुपये, गोवा में 406 रुपये, केरल में 401 रुपये और सिक्किम के ऊंचाई वाले ग्राम पंचायतों में 450 रुपये प्रतिदिन तय की गई है.
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