भारत से नेपाल को कनेक्ट करने के लिए नया रास्ता तैयार, यूपी के इस नए हाइवे पर होंगे 24 अंडरपास और 22 बायपास

आयशा शेख़

• 05:41 PM • 31 Jul 2026

गोरखपुर-सोनौली (नेपाल बॉर्डर) फोरलेन कॉरिडोर का लगभग 89% निर्माण पूरा हो चुका है. 1,458 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस NH-24 प्रोजेक्ट के पूरा होने पर गोरखपुर से सोनौली का सफर करीब 3 घंटे से घटकर लगभग 1 घंटे का रह जाएगा.

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गोरखपुर से नेपाल बॉर्डर जाना अब किसी झंझट भरा सफर नहीं, बल्कि एक शानदार राइड बनने जा रहा है. नेशनल हाईवे 24 (NH-24) पर गोरखपुर-सोनौली कॉरिडोर का काम अब अपने आखिरी दौर में है और लगभग 89% निर्माण पूरा हो चुका है. 1,458 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बन रही फोरलेन सड़क पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के बीच की दूरी को मिनटों में समेटने वाली है.

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पहले जिस दूरी को तय करने में लोगों के पसीने छूट जाते थे और 3 घंटे से ज्यादा का वक्त लगता था, अब वही सफर सिर्फ 1 घंटे के आसपास में पूरा हो जाएगा. ये रूट सिर्फ एक सड़क नहीं है, बल्कि व्यापार और पर्यटन की एक नई लाइफलाइन है. 

ट्रकों के लिए खास बायपास

सोनौली से जंगल कौड़िया तक करीब 79.54 किलोमीटर का पूरा स्ट्रेच पहले टू-लेन हुआ करता था, जहां अक्सर लंबा जाम देखने को मिलता था. चूंकि ये रास्ता इंटरनेशनल बॉर्डर को जोड़ता है, इसलिए यहां भारी मालवाहक ट्रकों की लंबी कतारें लगी रहती थीं.

अब इस समस्या का पक्का इलाज कर दिया गया है. पूरे रास्ते को चौड़ा करके फोरलेन बना दिया गया है. इस रूट पर जितने भी फ्लाईओवर बनाए गए हैं, वे सिक्स-लेन क्षमता के हैं. यानी आने वाले 10-20 सालों में अगर ट्रैफिक और बढ़ता है, तो फिर से तोड़-फोड़ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

ट्रकों की सुगम आवाजाही के लिए 22 अलग बायपास और नोड्स तैयार किए गए हैं ताकि शहर के अंदर जाम न लगे.

क्या-क्या बना है इस 80 किमी के दायरे में?

इस प्रोजेक्ट का इंफ्रास्ट्रक्चर वाकई कमाल का है. स्थानीय लोगों और लंबी दूरी के मुसाफिरों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एनएचएआई (NHAI) ने यहां 1 रेलवे ओवरब्रिज (ROB), 2 बड़े फ्लाईओवर, 24 अंडरपास, 105 कलवर्ट (पुलिया) और 68 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का निर्माण किया है.

सुरक्षा का भी पूरा इंतजाम

सड़क सिर्फ चौड़ी ही नहीं हुई है, बल्कि इसे देश के सबसे सुरक्षित रास्तों में से एक बनाया जा रहा है. इसके लिए एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) लागू किया जा रहा है. इसकी मदद से हाईवे पर चौबीसों घंटे सीसीटीवी से निगरानी होगी. 

कहीं जाम लगा या हादसा हुआ, तो कंट्रोल रूम को तुरंत पता चल जाएगा. रास्ते में 'वेरिएबल मैसेज साइन बोर्ड' लगेंगे जो आपको आगे के ट्रैफिक की लाइव जानकारी देंगे. किसी भी इमरजेंसी के लिए जगह-जगह 'इमरजेंसी कॉल बॉक्स', क्रैश बैरियर और एम्बुलेंस की तैनाती की जा रही है.

व्यापार, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा नया आसमान

नए हाईवे के बनने से सबसे बड़ा फायदा नेपाल के लुंबिनी जाने वाले बौद्ध पर्यटकों और स्थानीय व्यापारियों को होने वाला है. गोरखपुर एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और बड़े अस्पतालों तक पहुंच अब बेहद आसान हो गई है.

सड़क किनारे रहने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि ओवरब्रिज और फोरलेन बनने से एक्सीडेंट और ट्रैफिक का डर खत्म हो गया है. जगह-जगह नई दुकानें, टपरी और ढाबे खुलने लगे हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को रोज़गार मिल रहा है. किसानों को भी अपनी फसल और सब्जियां समय पर बड़ी मंडियों तक पहुंचाने में मदद मिल रही है.

पर्यावरण का ध्यान रखते हुए इस पूरे कॉरिडोर के दोनों तरफ 45,000 पौधे लगाए जा रहे हैं, जो इस सफर को न सिर्फ रफ्तार देंगे बल्कि हरियाली और खूबसूरती भी बिखेरेंगे.