जंतर मंतर पर पीएम मोदी के खिलाफ हुई अभद्र नारेबाजी! सुप्रीम कोर्ट की महिला वकील स्मृति सिंह ने किसके खिलाफ करा दी FIR

हिमांशु मिश्रा

• 07:58 PM • 30 Jul 2026

जंतर-मंतर प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक नारेबाजी के मामले में नोएडा निवासी महिला पर एफआईआर दर्ज हुई है. जीरो एफआईआर को संसद मार्ग थाने भेजकर पुलिस ने मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.

Smriti Singh, who filed the FIR

Smriti Singh, who filed the FIR

Google CTA

जंतर-मंतर पर हुए एक प्रोटेस्ट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अभद्र नारेबाजी करने का मामला सामने आया है. इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता स्मृति सिंह चंदेल ने नोएडा की रहने वाली रूचिका सिंह नाम की एक महिला के खिलाफ FIR दर्ज कराई है. शुरुआत में गौतमबुद्ध नगर के थाना एक्सप्रेस-वे पर जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी जिसे अब आगे की जांच के लिए दिल्ली के संसद मार्ग थाने में ट्रांसफर कर दिया गया है.

यह भी पढ़ें...

23 जुलाई की घटना और आरोप

शिकायतकर्ता स्मृति सिंह के अनुसार, यह घटना 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान हुई थी. आरोप है कि नोएडा की रहने वाली रूचिका सिंह ने प्रधानमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ बेहद भद्दी और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जिससे पद की गरिमा को ठेस पहुंची है. शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस तरह के बयानों से समाज में वैमनस्य फैलने और शांति व्यवस्था बिगड़ने की पूरी आशंका है.

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने केस दर्ज किया है. घटना दिल्ली के जंतर-मंतर की होने के कारण जीरो एफआईआर दर्ज कर संसद मार्ग थाने को भेज दी गई है जहां पुलिस मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच करेगी. इस दौरान यह भी स्पष्ट किया गया है कि 29 जुलाई को आरोपी महिला के खिलाफ कोई अलग से एफआईआर दर्ज नहीं की गई है बल्कि शिकायतकर्ता की तहरीर पर ही कार्रवाई हुई है.

स्मृति सिंह ने क्या कहा

मामले में शिकायतकर्ता और सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता स्मृति सिंह चंदेल का एक वीडियो भी सामने आया है. उन्होंने एफआईआर दर्ज कराने की वजह बताते हुए कहा 'मैंने जंतर-मंतर पर हमारे देश के प्रधानमंत्री और उनकी दिवंगत माता जी के खिलाफ गंदी और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले आंदोलनकारियों पर मुकदमा दर्ज करवाया है. हम हिंदुस्तान के संस्कारों में पले-बढ़े हैं और हमें अपनी भाषा की मर्यादा रखनी चाहिए. मैं नहीं चाहती कि सोशल मीडिया के जरिए हमारे बच्चे इस तरह की भद्दी भाषा सुनें और उसका समर्थन करें. इसी वजह से मैंने यह कानूनी कदम उठाया है.'