ट्रेन के कोच में लगी ये छोटी सीट किसकी होती है? जानिए इस पर बैठने का नियम

यूपी तक

• 01:48 PM • 02 Oct 2026

Train Gate Seat: आपने भी ट्रेन में सफर करने के दौरान अपने कोच में गेट के पास लगी एक छोटी सी सीट जरूर देखी होगी. इस सीट को देखकर कई तरह के सवाल मन में आते हैं कि आखिर ये सीट किसकी है और क्या इस पर बैठ सकते हैं या नहीं?

UP Tak
Google CTA

Train Gate Seat: आपने भी ट्रेन में सफर करने के दौरान अपने कोच में गेट के पास लगी एक छोटी सी सीट जरूर देखी होगी. इस सीट को देखकर कई तरह के सवाल मन में आते हैं कि आखिर ये सीट किसकी है और क्या इस पर बैठ सकते हैं या नहीं? जानकारी के लिए बता दें, ट्रेन में मौजूद हर सीट यात्रियों के बैठने के लिए नहीं होती है. गेट के पास लगी कुछ सीटें रेलवे कर्मचारियों के काम से जुड़ी हो सकती हैं, जबकि कुछ सीटें बाकायदा यात्रियों के लिए निर्धारित होती हैं. ऐसे में सिर्फ सीट को देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि वह टीटीई के लिए ही बनाई गई है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि गेट के पास लगी इस छोटी सीट का इस्तेमाल कब और कौन कर सकता है.

यह भी पढ़ें...

गेट के पास क्यों होती है सीट?

ट्रेन के दरवाजे के आसपास रेलवे कर्मचारियों के काम से जुड़ी कुछ जगहें होती हैं. कई कोच में गेट के पास छोटी सीट या फोल्डिंग सीट भी लगी होती है. इसका इस्तेमाल ड्यूटी पर मौजूद रेलवे कर्मचारी कर सकते हैं.

इसी वजह से कई यात्री गेट के पास लगी छोटी सीट को टीटीई की सीट समझ लेते हैं. ट्रेन के हर गेट के पास लगी सीट सिर्फ टीटीई के लिए हो, यह जरूरी नहीं है.

क्या यात्री इस सीट पर बैठ सकते हैं?

अगर गेट के पास लगी सीट कोच की निर्धारित यात्री सीट नहीं है और रेलवे स्टाफ के इस्तेमाल के लिए दी गई है, तो यात्रियों को उस पर बैठने से बचना चाहिए. ट्रेन में हर सीट और जगह का एक तय इस्तेमाल होता है.

अगर गेट के पास मौजूद सीट बाकायदा यात्री सीट के तौर पर दी गई है और उसका नंबर भी सीटिंग व्यवस्था में शामिल है, तो उस पर वही यात्री बैठ सकता है जिसके टिकट पर वह सीट आवंटित है.

सीट की पहचान कैसे करें?

सिर्फ गेट के पास छोटी सीट देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि वह टीटीई की सीट है. इसकी असली पहचान इस बात से होती है कि वह कोच में किस जगह दी गई है और रेलवे की सीटिंग व्यवस्था में उसका इस्तेमाल क्या निर्धारित है.

इसलिए ट्रेन में ऐसी सीट दिखाई देने पर पहले यह देखना जरूरी है कि वह यात्री के लिए निर्धारित है या रेलवे स्टाफ के इस्तेमाल के लिए.

टीटीई का काम क्या होता है?

टीटीई की ड्यूटी केवल एक जगह बैठने तक सीमित नहीं होती है. वह पूरे कोच में टिकट और यात्रियों की जांच करता है. जरूरत के अनुसार वह यात्रियों से बातचीत करता है और उनकी समस्याओं को भी देखता है.

इसी वजह से गेट के पास कोई छोटी सीट देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं है कि वह केवल टीटीई के बैठने के लिए बनाई गई है.

बैठने से पहले सीट जरूर देखें

अगली बार ट्रेन के गेट के पास ऐसी छोटी सीट दिखाई दे तो उस पर बैठने से पहले यह जरूर देख लें कि वह यात्री सीट है या रेलवे स्टाफ के इस्तेमाल की जगह है. अगर वह निर्धारित यात्री सीट है और आपके टिकट पर वही सीट आवंटित है, तभी आप उस पर बैठ सकते हैं.

यह भी देखें: 1 अक्टूबर से रेलवे के नए नियम: टिकट है, फिर भी देना पड़ सकता है जुर्माना! अब ये दस्तावेज जरूरी