क्या सुभासपा और सपा का होने वाला है गठबंधन? अखिलेश यादव ने ओपी राजभर को दिया बड़ा ऑफर!

रजत सिंह

• 12:08 PM • 02 Oct 2026

UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में पूर्वांचल को लेकर एक बार फिर समाजवादी पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के बीच चर्चा शुरू हो गई है. अखिलेश यादव ने एक कार्यक्रम के दौरान इशारों ही इशारों में कहा है कि अगर राजभर सपा के साथ आना चाहें तो आ सकते हैं.

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UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में पूर्वांचल को लेकर एक बार फिर समाजवादी पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के बीच चर्चा शुरू हो गई है. ओम प्रकाश राजभर लगातार समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साध रहे हैं. अब अखिलेश यादव ने भी राजभर को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसके बाद राजनीतिक महकमे में एक अलग ही चर्चा शुरू हो गई है. सवाल उठने लगे हैं कि क्या दोनों के बीच फिर से सियासी नजदीकी की कोई गुंजाइश बची हुई है. दरअसल अखिलेश यादव ने एक कार्यक्रम के दौरान इशारों ही इशारों में कहा है कि अगर राजभर सपा के साथ आना चाहें तो आ सकते हैं. जिसके बाद सवाल यह उठ रहा है कि क्या अखिलेश यादव का यह बयान महज एक तंज है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक संभावना भी है.

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अखिलेश ने राजभर पर क्या कहा

एक कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव से जब ओम प्रकाश राजभर को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा है कि समाजवादी पार्टी के वोट से चुनाव जीतकर सदन पहुंचे थे, वे अब बीजेपी के वोट से कैसे जीतेंगे?

अखिलेश यादव ने कहा कि ये लोग अब नई जगह की तलाश कर रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि सपा में लौटना मुश्किल है. उन्होंने सवाल किया कि क्या बीजेपी में ऐसे सभी लोगों का टिकट पक्का हो गया है, जो कभी समाजवादी पार्टी के वोट से जीतकर सदन पहुंचे थे.

राजभर का अखिलेश पर सोशल मीडिया वार

ओम प्रकाश राजभर भी लगातार अखिलेश यादव पर हमलावर हैं. उन्होंने हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट लिखकर राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर तंज कसा था. राजभर ने राहुल गांधी से पूछा कि वह अपने दोस्त अखिलेश से पूछें कि वह विपक्षी गठबंधन की बैठक में क्यों नहीं गए थे? राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव एसी कमरों में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और सिर्फ ठहाके लगाते हैं. 

राजभर की ताकत और सपा का फायदा

पूर्वांचल में ओम प्रकाश राजभर का अपना एक मजबूत वोट बैंक है. राजभर समुदाय में उनकी अच्छी खासी पकड़ मानी जाती है. कहा जाता है कि जब राजभर सपा के साथ गठबंधन में थे, तो गाजीपुर और आजमगढ़ जैसी जगहों पर गठबंधन को मिली क्लीन स्वीप में उनकी बड़ी भूमिका थी. हालांकि, बीजेपी के साथ गठबंधन में जाने के बाद राजभर को वह फायदा नहीं मिल पाया और उनके बेटे लोकसभा व विधानसभा चुनाव हार गए.

क्या फिर खुलेंगे राजभर के लिए दरवाजे?

अब अखिलेश यादव के इस बयान के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या राजभर के लिए सपा के दरवाजे फिर से खुल सकते हैं? हालांकि, सूत्रों का मानना है कि राजभर ने हाल ही में जिस तरह से अखिलेश यादव पर व्यक्तिगत हमले किए हैं, उसके बाद उनकी वापसी की राह इतनी आसान नहीं होगी. राजनीतिक जानकारों का यह भी कहना है कि पूर्वांचल में अभी भी कुछ ऐसी पार्टियां हैं जिनके दरवाजे राजभर के लिए खुल सकते हैं.

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