Bhadohi Renamed: उत्तर प्रदेश की राजनीति में शहरों का नाम बदलने का चलन कोई नया नहीं है. इस बार नाम बदलने की सियासत का केंद्र बना है पूर्वांचल का 'भदोही', जिसे पूरी दुनिया अपनी बेहतरीन कालीनों के लिए जानती है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही का नाम बदलकर वापस दलित महापुरुष के नाम पर 'संत रविदास नगर' करने की घोषणा कर दी है. अब इस फैसले के बाद अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के निशाने पर आ गए हैं. दलित वोटों को साधने और पूर्वांचल की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने की यह बीजेपी की यह एक बड़ी रणनीति मानी जा रही है.
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भदोही के नाम बदलने का पुराना इतिहास
भदोही के नाम की कहानी मायावती के शासनकाल से शुरू होती है. सबसे पहले मायावती ने दलित महापुरुष संत रविदास के सम्मान में इसका नाम 'संत रविदास नगर' रखा था. इसके बाद साल 2012 में जब अखिलेश यादव की सरकार आई, तो उन्होंने 2014 में कैबिनेट बैठक के जरिए इसका नाम फिर से 'भदोही' कर दिया था. अब एक बार फिर योगी सरकार ने इसे बदलकर 'संत रविदास नगर' करने का ऐलान कर दिया है.
अखिलेश यादव पर महापाप का आरोप
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाम बदलने के इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी को जमकर घेरा है. उन्होंने अखिलेश यादव के फैसले को 'सपा का महापाप' बताते हुए कहा कि उन्होंने संत रविदास जी के नाम पर बने जिले का नाम हटाकर बहुत बड़ी गलती की थी. अब बीजेपी अखिलेश यादव को दलित विरोधी साबित करने की कोशिश कर रही है, ताकि दलित वोटों में सेंध लगाई जा सके.
कारोबारियों ने अखिलेश से की थी मांग
अखिलेश यादव द्वारा नाम बदलने के पीछे की असली कहानी बिजनेस और कालीन उद्योग से जुड़ी है. कॉर्पोरेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के सदस्य पीयूष बरनवाल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भदोही अपनी कालीन के लिए बहुत मशहूर है. विदेशी खरीदारों और निर्यातकों को 'भदोही' नाम याद रखने और बोलने में आसानी होती है. इसलिए, कारोबारियों की मांग पर ही अखिलेश यादव ने इसका नाम वापस भदोही किया था.
व्यापारियों की योगी सरकार से नई मांग
भदोही का नाम दोबारा संत रविदास नगर किए जाने पर स्थानीय कारोबारियों ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि संत रविदास नगर नाम से उन्हें कोई एतराज नहीं है, लेकिन भदोही का नाम हटने से उनके धंधे पर असर पड़ सकता है. व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि जिले का नाम 'संत रविदास नगर (भदोही)' कर दिया जाए, ताकि दुनिया भर में उनके कालीन की पहचान और व्यापार दोनों बने रहें.
पूर्वांचल में पीडीए (PDA) को तोड़ने की रणनीति
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भदोही का नाम बदलने के पीछे बीजेपी की बड़ी सियासी चाल है. लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल के कई जिले जैसे- जौनपुर, गाजीपुर, बलिया में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था. अखिलेश यादव का पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण वहां काफी मजबूत साबित हुआ था. अब बीजेपी संत रविदास के नाम के सहारे दलित और वाल्मीकि वोटों को अपने पाले में करके समाजवादी पार्टी के इस मजबूत वोट बैंक को तोड़ना चाहती है.
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