छात्र आंदोलन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के मामले में फरीदाबाद की रहने वाली रुचिका सिंह की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. वीडियो वायरल होने के बाद नोएडा पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. हालांकि इस FIR को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया है.
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क्या है पूरा मामला?
23 जुलाई को छात्र आंदोलन के दौरान नोएडा में ब्यूटी सैलून चलाने वाली रुचिका सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था. आरोप है कि इस वीडियो में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था. वीडियो के वायरल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट की वकील स्मृति सिंह ने रुचिका सिंह के खिलाफ FIR फाइल दी.
गाली देना क्रिमिनल ऑफेंस नहीं-सौरभ दास
मामले में रुचिका सिंह के बचाव में उतरते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट कर पुलिस कार्रवाई पर तीखे सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि किसी के बयान की निंदा की जा सकती है. लेकिन एक 25 साल की लड़की पर क्रिमिनल मशीनरी का इस्तेमाल करना और पुलिस के जरिए उसे टारगेट करना पूरी तरह से गलत है.
सौरभ दास का कहना था कि देश में गाली देना क्रिमिनल ऑफेंस नहीं है और अगर प्रधानमंत्री को बुरा लगा है तो वे मानहानि का केस कर सकते हैं. लेकिन पुलिस के जरिए हैरेसमेंट स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने लोकसभा सांसदों पर दर्ज मामलों का हवाला देते हुए पुलिस से युवाओं का उत्पीड़न बंद करने की अपील की.
मुकदमों की वापसी पर अड़ी पार्टी
गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों ने सरकार द्वारा मांगें मान लिए जाने के बाद हाल ही में अपना आंदोलन वापस लिया था. पार्टी की प्रमुख शर्तों में यह भी शामिल था कि किसी भी प्रदर्शनकारी छात्र या युवा पर कोई कानूनी कार्रवाई या एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी. सीजेपी ने चेतावनी दी है कि यदि युवाओं और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो वे एक बार फिर से सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे.
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर लोकतंत्र में असहमति जताने के तरीकों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं पर बहस छेड़ दी है. एक तरफ जहां किसी भी सार्वजनिक मंच से देश के शीर्ष संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए ऐसी भाषा के इस्तेमाल को अनुचित और अलोकतांत्रिक माना जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या विरोध के नाम पर की गई बयानबाजी पर सीधी आपराधिक कार्रवाई वाजिब है या नहीं. फिलहाल पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है.
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