Ajay Rai: उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव लड़ने कि तैयारी कर रहे हैं. अजय राय वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए भी जाने जाते हैं. हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में उन्होंने वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर भी दी थी.
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अब उन्होंने ऐलान किया है कि वह अगला विधानसभा चुनाव अपने गढ़ यानी पिंडरा सीट से लड़ेंगे. एक समय था जब अजय राय को बीजेपी का दिग्गज नेता कहा जाता था. हालांकि अजय राय ने बाद में बीजेपी का दामन छोड़ दिया और पार्टी बदलकर साल 2012 में कांग्रेस का दामन थामकर विधानसभा का चुनाव जीता, लेकिन 2017 से सब बदल गया. वह पिंडरा सीट से लगातार दो बार चुनाव हार चुके हैं.
अब अजय राय ने एक बार फिर डंके की चोट पर विधानसभा चुनाव लड़ने का मन बना लिया है. उनका मानना है कि पिंडरा की जनता पूरी तरह से उनके साथ खड़ी है. तो वहीं, स्थानीय समीकरण और राजनीतिक गणित को देखा जाए, तो उनकी जीत की राह बहुत आसान भी नहीं लग रही है.
मंच से किया डंके की चोट पर ऐलान
एक कार्यक्रम के दौरान अजय राय ने पूरे आत्मविश्वास के साथ पिंडरा से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि 'मैं बनारस कैसे भूल सकता हूं? मैं डंके की चोट पर चुनाव लड़ूंगा.' उन्होंने अपने पुराने चुनावी सफर को याद करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने दिग्गज नेता उदल और सोनेलाल को हराकर लगातार कई बार जीत हासिल की थी.
अजय राय का कैसा रहा है राजनीतिक सफर?
पिंडरा सीट (जो पहले कोलसला हुआ करती थी) से अजय राय का पुराना नाता रहा है. 2002 और 2007 में वह बीजेपी के टिकट पर यहां से चुनाव जीत चुके हैं. उस समय उनकी छवि एक 'रॉबिन हुड' जैसी थी, जो लोगों के सुख-दुख में हमेशा खड़ा रहता था. लेकिन मुरली मनोहर जोशी के बनारस आने के बाद अजय राय का बीजेपी से पत्ता कट गया. 2009 में वह निर्दलीय चुनाव लड़े और जीते भी. इसके बाद 2012 में अजय राय कांग्रेस में शामिल हो गए और फिर कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी जीता.
2017 के बाद पलट गया था सारा खेल
2017 के विधानसभा चुनाव में खेल पूरी तरह से पलट गया. बीजेपी के अवधेश सिंह ने अजय राय को मात दे दी. अजय राय को 2017 में 52,000 और 2022 में करीब 48,000 वोट मिले थे. तो वहीं, अवधेश सिंह को 2017 में 90,000 और 2022 में 84,000 के करीब वोट मिले थे. अजय राय दोनों बार तीसरे नंबर पर रहे हैं.
दलित और कुर्मी वोट बैंक होगा निर्णायक
पिंडरा सीट पर जीत हासिल करना अजय राय के लिए आसान नहीं होने वाला है. पिंडरा मछली शहर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. 2024 के लोकसभा चुनाव में मछली शहर से सपा की प्रिया सरोज ने यहां से चुनाव जीता है, लेकिन वह पिंडरा विधानसभा क्षेत्र से पीछे ही रही थीं. इस इलाके में दलित और कुर्मी वोटरों की अच्छी खासी संख्या है, जो हार-जीत तय कर सकती है. कुर्मी वोट आमतौर पर अपना दल की वजह से बीजेपी के साथ जाता है, ऐसे में इन वोटों को अपने पक्ष में साधना अजय राय के लिए एक बड़ी चुनौती होगी.
स्थानीय पत्रकारों की क्या है राय
स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि अजय राय की पिंडरा के हर घर में अच्छी पैठ है और वह आम जनता के बीच लगातार आते-जाते रहते हैं. पहले चर्चा थी कि उनकी पत्नी रीना राय पिंडरा से चुनाव लड़ सकती हैं, लेकिन अब उन्होंने खुद चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. पत्रकारों के अनुसार, वर्तमान बीजेपी विधायक के खिलाफ इलाके में नाराजगी (एंटी-इनकंबेंसी) है. पिंडरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट होने के बावजूद उम्मीद के मुताबिक विकास नहीं हुआ है, जिसका सीधा फायदा अजय राय को मिल सकता है, लेकिन यह सवाल अभी भी जायज है कि क्या कांग्रेस और सपा का गठबंधन अजय राय को जीत दिला पाएगा.
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