दिल्ली के जंतर-मंतर पर जून महीने में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान गाजियाबाद की प्रदर्शनकारी निशु आजाद के पिता संजय कुमार पर हुए हमले का मामला सोशल मीडिया से लेकर देश की राजनीति में छाया हुआ है. एक पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज नाम के हिंदूवादी एक्टिविस्ट ने सीना ठोक कर हमले की बात स्वीकारी और सियासी पहुंच का जिक्र किया, जिसके बाद यह विवाद गहरा गया. मामले में राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव तक के बयान सामने आने के बाद हमने आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज से बातचीत की, जिसमें उसने घटना पर अपनी सफाई पेश की है.
ADVERTISEMENT
'मॉब लिंचिंग का प्रयास हुआ, आत्मरक्षा में गलती से लगा कड़ा'
अपने ऊपर लगे आरोपों और वायरल वीडियो पर सफाई देते हुए स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा कि जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रोटेस्ट के दौरान कुछ मांगे सही थीं, इसलिए वह भी वहां गया था. लेकिन वहां सनातन धर्म और प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र बयानबाजी की जा रही थी.
स्वतंत्र भारद्वाज का दावा है, "निशु के पिता द्वारा मेरा वीडियो शूट किया जा रहा था और अभद्र भाषा का इस्तेमाल हो रहा था. जब मैंने उनका कैमरा बंद कराया तो वहां मौजूद सीजेपी के तमाम लोग मेरे ऊपर चढ़ गए और मेरी मॉब लिंचिंग करने का प्रयास किया गया. अपने सेल्फ डिफेंस में, क्योंकि कानून हमें इसका अधिकार देता है, जब मैंने हाथ चलाया तो मेरे हाथ में पहना हुआ कड़ा गलती से उनके सिर पर लग गया."
'मेडिकल रिपोर्ट में कुछ नहीं'
पीड़ित पक्ष द्वारा 307 (हत्या के प्रयास) की धारा न लगाने और पुलिस की निष्क्रियता के आरोपों पर स्वतंत्र ने कहा कि यह उनके खिलाफ एक प्रोपोगेंडा है. उसने दावा किया कि पीड़ित के सिर पर कई सारे टांके आने की बात में सच्चाई नहीं है और आरएमएल (राम मनोहर लोहिया) अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में सिर फटने या गंभीर चोट का कोई जिक्र नहीं आया है.
स्वतंत्र के अनुसार, घटना के बाद पुलिस ने कानून के दायरे में जो भी धाराएं बनती थीं, उनके तहत कार्रवाई की और हिरासत में लेकर पूछताछ की प्रक्रिया पूरी की गई. उसने आरोप लगाया कि मेडिकल रिपोर्ट के बावजूद उसे फंसाने की कोशिश की जा रही है.
'सारकेस्टिक अंदाज में कही थी बात'
पॉडकास्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और कपिल मिश्रा जैसे नेताओं का नाम लेने और फोन कॉल से बचने के दावों पर पूछे गए सवाल पर स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा, "मैंने कभी नहीं कहा कि किसी बड़े नेता का फोन कॉल आया और पुलिस ने मुझे छोड़ दिया. लोग वीडियो को गलत तरीके से प्रचारित कर रहे हैं. मैंने एक सारकेस्टिक (व्यंग्यात्मक) अंदाज में कहा था कि हम जात-पात से ऊपर उठकर 'हिंदू-हिंदू भाई-भाई' की बात करते हैं."
उसने आगे कहा, "ओबीसी समाज से आने वाले मोदी जी, एससी समाज के चिराग पासवान और जनरल समाज के कपिल मिश्रा- इन सभी को भाई बताने का मकसद केवल यह दिखाना था कि हम सब एकजुट हैं. इसका यह मतलब निकालना कि ये लोग मुझे बचा रहे हैं, पूरी तरह से गलत है."
'डेथ थ्रेट्स' मिलने का दावा और निशाना बनाए जाने का आरोप
स्वतंत्र भारद्वाज ने बताया कि वह एक स्टूडेंट होने के साथ-साथ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और गौ सेवक भी है. उसने आरोप लगाया कि घटना के बाद से उसे लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं.
उसने कहा, "कई लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि स्वतंत्र भारद्वाज को जेल नहीं भेजा तो सर तन से अलग कर देंगे. जब मुझे डेथ थ्रेट्स मिल रहे थे, तब किसी विपक्षी नेता ने आवाज नहीं उठाई. आज राहुल गांधी मेरे खिलाफ पोस्ट कर रहे हैं. चूंकि मैं ब्राह्मण हूं, आर्थिक आधार पर आरक्षण की बात करता हूं और सनातन धर्म के लिए काम करता हूं, इसलिए राजनीतिक दल और विरोधी मुझे टारगेट कर रहे हैं."
पुलिस की कार्रवाई और क्या है पूरा विवाद
गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर सीजेपी का प्रदर्शन चल रहा था, जहां निशु आजाद अपने पिता के साथ शामिल होने पहुंची थीं. मारपीट के बाद पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में मामला दर्ज किया गया था.
पुलिस के अनुसार, आरएमएल अस्पताल की मेडिकल जांच में चोट मामूली पाई गई थी और सिर में क्रैक या गंभीर चोट की बात खारिज की गई थी. पुलिस ने मौके से पटना (बिहार) के रहने वाले स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी और बाद में कानूनी नोटिस देकर छोड़ दिया था. हालांकि, आरोपी के सरेआम घूमने और वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दल लगातार दिल्ली पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं.
ये भी पढ़ें:
ADVERTISEMENT











