नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शनों के बीच जब पीएम नरेंद्र मोदी ने पहली बार Gen Z स्टाइल में रील बनाकर युवाओं से जुड़ने की कोशिश की थी. इस दौरान उनके इस अंदाज की खासी चर्चा हुई थी. अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इसी राह पर चलते नजर आ रहे हैं. सीएम योगी ने हाथ में सेल्फी स्टिक थामकर अपनी एक खास रील बनाई है. यह रील उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के हवाई सर्वेक्षण के दौरान रिकॉर्ड की.
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राजनीतिक विश्लेषक इसे अखिलेश यादव के उस 'यूथ कार्ड' की काट के रूप में देख रहे हैं जिसके जरिए समाजवादी पार्टी लगातार युवाओं, पेपर लीक और रोजगार के मुद्दों पर सरकार को घेर रही है.
बाढ़ सर्वेक्षण के दौरान दिखे सीएम योगी के नए तेवर
सीएम योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेते हुए खुद ही सेल्फी स्टिक से अपना वीडियो रिकॉर्ड किया. रील की शुरुआत में उन्होंने बाबा नीम करौरी की पावन धरा फर्रूखाबाद को नमन किया. इसके बाद जनता को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए पूरी तरह तैयार है.
रील में सीएम योगी कहते सुने जा सकते हैं 'बाबा नीम करोरी की पावन धरा फर्रूखाबाद को मेरा सादर नमन. आज मैं जनपद के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करूंगा. वहां प्रभावित परिवारों से मिलकर उनका कुशलक्षेम जानूंगा, उनकी समस्याओं को सुनूंगा और बाढ़ राहत सामग्री भी वितरित करूंगा.'
अखिलेश यादव के 'यूथ कनेक्ट' का तोड़?
सीएम योगी के इस नए अवतार को युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करने की कवायद माना जा रहा है. दरअसल समाजवादी पार्टी लंबे समय से युवाओं के मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है. जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी प्रोटेस्ट के दौरान सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज और प्रिया सरोज जैसे युवा चेहरे लगातार डटे रहे. वहीं सपा सांसद डिंपल यादव भी प्रदर्शन में शामिल हुईं और लाठीचार्ज में घायल छात्रों को संभालती नजर आईं.
अखिलेश यादव लगातार सदन से लेकर सड़क तक रोजगार और पेपर लीक जैसे विषयों को लेकर सरकार पर हमलावर हैं. ऐसे में बीजेपी भी युवाओं के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए सोशल मीडिया कंटेंट और रील्स का सहारा ले रही है.
17 सितंबर से बीजेपी का मेगा डिजिटल अभियान
सीएम योगी की रील के साथ ही भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में एक बड़ा डिजिटल कैम्पेन शुरू करने जा रही है. यह कैम्पेन 17 सितंबर से पूरे यूपी में लॉन्च होगा. राज्य भर के 27000 से ज्यादा शक्ति केंद्रों को सोशल मीडिया रील्स बनाने का काम सौंपा गया है. हर शक्ति केंद्र को कम से कम 10 शॉर्ट वीडियो या रील्स बनाने का लक्ष्य दिया गया है. इन रील्स के जरिए सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और पार्टी की विचारधारा को शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट में बदलकर युवा वोटर्स तक पहुंचाया जाएगा.
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