नेहरू होते तो कांशीराम यूपी के सीएम... राहुल गांधी ने दिया ये बयान तो मायावती ने कांग्रेस को सुना दिया

Rahul Gandhi Kanshi Ram statement: लखनऊ में कांशीराम जयंती कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी के बयान से यूपी की राजनीति गरमा गई. दलित वोट बैंक को लेकर कांग्रेस की सक्रियता पर मायावती ने तीखा हमला बोलते हुए इसे चुनावी पाखंड बताया.

यूपी तक

• 03:57 PM • 14 Mar 2026

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Rahul Gandhi Kanshi Ram statement: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के महासंग्राम की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है. इस बार केंद्र में हैं बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम. लखनऊ की धरती पर राहुल गांधी के एक कबूलनामे ने सूबे के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. कांग्रेस की इस सक्रियता से साफ है कि मुस्लिम वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करने के बाद अब उसकी नजर अपने उस पुराने दलित किले को वापस पाने पर है, जो दशकों पहले उसके हाथ से खिसक गया था.

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कांशीराम की जयंती की पूर्व संध्या पर कांग्रेस द्वारा आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी का अंदाज बिल्कुल अलग था. उन्होंने न केवल दलित कार्यकर्ताओं को संबोधित किया, बल्कि कांग्रेस के इतिहास की उन गलतियों को भी स्वीकार किया जिसकी वजह से दलितों का मोहभंग हुआ था.

राहुल गांधी ने मंच से दो ऐसी बातें कहीं जो कांग्रेस के नए एजेंडे को साफ करती हैं:

"अगर कांग्रेस ने अपना काम ठीक से किया होता, तो कांशीराम होते ही नहीं": यह कहकर राहुल ने माना कि कांग्रेस दलितों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, जिसके कारण कांशीराम जैसे नेताओं को अपना अलग रास्ता बनाना पड़ा.

"जवाहरलाल नेहरू होते तो कांशीराम यूपी के सीएम होते": इस बयान के जरिए राहुल ने यह संदेश देने की कोशिश की कि नेहरू के दौर में जो तवज्जो दलितों को मिलती थी, वह बाद के दशकों में गायब हो गई.

कांग्रेस ने शोक तक नहीं मनाया था: मायावती का कड़ा प्रहार

राहुल गांधी द्वारा कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग पर बसपा प्रमुख मायावती ने तीखा पलटवार किया है. उन्होंने कांग्रेस को आईना दिखाते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि जिस कांग्रेस ने बाबा साहब अंबेडकर को भारत रत्न के लायक नहीं समझा और कांशीराम के निधन पर एक दिन का राष्ट्रीय शोक तक घोषित नहीं किया, वह आज किस मुंह से ऐसी बातें कर रही है. मायावती ने इसे कांग्रेस का चुनावी पाखंड करार दिया है.

2024 के लोकसभा चुनाव में दलितों के एक हिस्से ने सपा-कांग्रेस गठबंधन का साथ दिया था. अब 2027 के लिए यह वोट बैंक निर्णायक बन गया है. कांग्रेस और सपा जानते हैं कि बिना दलितों (खासकर जाटव वोट) के पूर्ण समर्थन के यूपी की सत्ता तक पहुंचना नामुमकिन है. दूसरी ओर, मायावती के लिए अपने आधार वोट को बचाए रखना उनके अस्तित्व का सवाल है.

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