Allahabad High Court decision: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज होने के बाद यह प्रकरण लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. उन पर नाबालिग से जुड़े कथित यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं. हालांकि स्वामी ने इन आरोपों को शुरू से ही निराधार और साजिश करार दिया है. उनका कहना है कि उनकी छवि धूमिल करने और अन्य चर्चित मुद्दों से ध्यान भटकाने के उद्देश्य से यह मामला गढ़ा गया है. इसी मामले में गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है, जिस पर आज अहम सुनवाई हुई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ पॉस्को मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत पर फैसला सुना दिया है.
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बता दें कि हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक स्वामी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है. यानी मामले की अगली तारीख तक उनके खिलाफ कोई गिरफ्तारी नहीं की जाएगी. अदालत के इस आदेश से फिलहाल उन्हें अस्थायी राहत मिल गई है. हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को 12 मार्च तक अपने-अपने लिखित पक्ष दाखिल करने के लिए समय दिया है. इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया है कि मामले में अगला आदेश मार्च के तीसरे सप्ताह में सुनाया जाएगा.
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
इलाहाबाद हाई कोर्ट में शुक्रवार को दोपहर करीब 3.45 बजे स्वामी की एंटीसिपेटरी बेल अर्जी पर सुनवाई शुरू हुई थी.सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि इस याचिका पर सीधे सुनवाई करना कठिन हो सकता है.अदालत ने पूछा कि जब सेशन कोर्ट का विकल्प उपलब्ध था तो सीधे हाईकोर्ट क्यों आए. अदालत ने कहा कि “हालांकि हाईकोर्ट के पास इस याचिका को सुनने का अधिकार है लेकिन यह उचित प्रक्रिया नहीं मानी जाएगी. पहले सेशन कोर्ट जाना चाहिए था”
कोर्ट ने बचाव पक्ष से कहा कि वे यह स्पष्ट करें कि हाईकोर्ट इस मामले को सीधे क्यों सुने. इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने दलील दी कि हाईकोर्ट और सेशन कोर्ट दोनों के पास समानांतर अधिकार क्षेत्र है और हाईकोर्ट भी याचिका सुन सकता है.
सुनवाई में कौन-कौन है मौजूद?
बता दें कि सरकारी पक्ष की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) ने अदालत में मामला रखा है. पीड़ित पक्ष की तरफ से वकील रूपक चौबे और संजय सिंह कोर्ट में मौजूद हैं. इसके अलावा सरकार की ओर से कहा गया कि कथित पीड़ित ‘बटुक’ का पक्ष मजबूत तरीके से रखा जाएगा और स्वामी की अग्रिम जमानत का सख्त विरोध किया जाएगा . वहीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता राजऋषि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश ने अदालत में उनका पक्ष रखा.
नार्को टेस्ट के लिए जताई सहमति
वाराणसी में मीडिया से बातचीत के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अगर सच सामने लाने के लिए नार्को एनालिसिस टेस्ट जरूरी है तो वह इसके लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि “अगर नार्को टेस्ट से सच्चाई सामने आती है तो इसे जरूर कराया जाना चाहिए. सत्य जानने के लिए उपलब्ध सभी तरीकों को अपनाया जाना चाहिए.” उन्होंने बताया कि उनके वकील अदालत में मौजूद हैं और सभी साक्ष्य पेश किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि झूठ ज्यादा समय तक नहीं टिकता और जो लोग झूठी कहानी गढ़ रहे हैं, वे धीरे-धीरे बेनकाब हो रहे हैं.
मेडिकल रिपोर्ट और आरोपों पर सवाल
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेडिकल जांच रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कई दिनों बाद कराई गई मेडिकल जांच से किसी की संलिप्तता कैसे साबित की जा सकती है. उन्होंने कहा कि भले ही कोई गलत घटना हुई हो इससे यह सिद्ध नहीं होता कि जिम्मेदार कौन है.उन्होंने यह भी कहा कि जिस बच्चे का नाम लिया जा रहा है, वह कभी उनके पास आया ही नहीं ऐसे में उन्हें इससे जोड़ना गलत है.
शिकायतकर्ता और पुलिस पर आरोप
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि बच्चे शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी उर्फ पांडे के साथ रह रहे थे और उन्हें जुवेनाइल होम क्यों नहीं भेजा गया. उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों को हरदोई के एक होटल में रखा गया और उन्हें पत्रकारों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई. यही नहीं स्वामी ने पुलिस पर भी शिकायतकर्ता को संरक्षण देने और उनके खिलाफ बयान तैयार करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि चाहे आरोप कितने भी विस्तार से गढ़े जाएं, अंततः सत्य सामने आएगा.
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