प्रयागराज में स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद और शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी पर POCSO एक्ट के तहत दर्ज हुई FIR, अब आगे क्या?
Prayagraj Swami Avimukteshwaranand Case: प्रयागराज के प्रयागराज में एडीजी रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के आदेश पर स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ क्राइम नंबर 58/2026 में BNS 351(3) और पोक्सो की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है.
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Prayagraj Swami Avimukteshwaranand Case: धार्मिक जगत से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला प्रयागराज से सामने आया है, जहां ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ पोक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है. एडीजी रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के आदेश के बाद झूसी थाने में यह मुकदमा लिखा गया है. आरोपों में नाबालिग शिष्यों के साथ यौन शोषण जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं. अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, नाबालिगों के बयानों और प्रस्तुत सामग्री को देखते हुए विस्तृत जांच आवश्यक बताते हुए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है.
किन धाराओं में दर्ज हुआ केस
यह मामला क्राइम नंबर 58/2026 के तहत दर्ज किया गया है. इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3) के साथ-साथ पोक्सो एक्ट की धाराएं 5/6/3/4(2)/16/17 (जैसा कि एफआईआर में उल्लेखित) लगाई गई हैं. एफआईआर में स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के अलावा दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है.
क्या हैं आरोप
दर्ज शिकायत के मुताबिक 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच शिष्यों के साथ यौन शोषण किए जाने का आरोप लगाया गया है. एफआईआर के अनुसार आशुतोष ब्रह्मचारी के पास पहुंचे दो शिष्यों, जिनमें एक बालिग और एक नाबालिग शामिल है ने आरोप लगाया कि स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी द्वारा उनके साथ यौन उत्पीड़न किया गया.
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शिकायत में यह भी कहा गया है कि साल 2025 के कुंभ मेले और 2026 के माघ मेले के दौरान लगाए गए शिविरों में भी दोनों शिष्यों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं हुईं. आरोप है कि माघ मेले के दौरान शिविर परिसर के अलावा स्वामी की शिविर के बाहर खड़ी गाड़ी में भी कथित रूप से शोषण किया गया.
कोर्ट ने क्यों दिया FIR का आदेश
यह आदेश एडीजी रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया ने याचिकाकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर सुनवाई के बाद दिया. याचिका में बनारस स्थित आश्रम में नाबालिगों के साथ यौन शोषण और लैंगिक अपराध किए जाने के आरोप लगाए गए थे. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया नाबालिगों के साथ गंभीर यौन अपराध के संकेत मिलते हैं. कोर्ट ने नाबालिगों के बयान, पुलिस कमिश्नर की रिपोर्ट और पेन ड्राइव में उपलब्ध सामग्री का अवलोकन किया. इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने माना कि मामले में विस्तृत विवेचना आवश्यक है और झूसी थाने को मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है.
नाबालिगों के बयान और आगे की प्रक्रिया
बताया गया है कि 23 फरवरी को आरोप लगाने वाले दोनों नाबालिगों के बयान अदालत में वीडियोग्राफी के साथ दर्ज किए गए. पुलिस रिपोर्ट पर भी अदालत ने संज्ञान लिया. बयान और रिपोर्ट पर विचार करने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था, जिसके बाद अब एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया गया है. कोर्ट के निर्देश के बाद प्रयागराज के प्रयागराज स्थित झूसी थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच प्रक्रिया शुरू की जा रही है.










