UP News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में पढ़ने वाली छात्राओं को अब और भी अधिक सुरक्षित और अनुशासित माहौल मिलेगा. इसके लिए प्रदेश के तीन प्रमुख केंद्रों- प्रतापगढ़, गाजियाबाद और अयोध्या में वार्डनों का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है.
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) के आवासीय वातावरण को अधिक प्रेरक और सशक्त बनाने की तैयारी पूरी कर ली गई है. इसके तहत वार्डनों को छात्रावास प्रबंधन, बालिका सुरक्षा और नेतृत्व कौशल में निपुण बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है. यह कार्यक्रम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन (NIEPA) और भारत सरकार के सहयोग से संचालित किया जा रहा है.
प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से अंडर सेक्रेटरी रामनिवास ऑनलाइन माध्यम से जुड़े. उन्होंने स्पष्ट किया कि कस्तूरबा गांधी विद्यालय उन बेटियों के लिए उम्मीद का मंच हैं जो वंचित पृष्ठभूमि से आती हैं. ऐसे में वार्डनों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे छात्राओं के लिए सुरक्षा और संवेदनशीलता सुनिश्चित करने की पहली कड़ी हैं. यह प्रशिक्षण उनकी प्रबंधन क्षमता और नेतृत्व कौशल को और निखारेगा.
ये हैं प्रशिक्षण के मुख्य पॉइंट्स
एनआईईपीए की ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर डॉ. सांत्वना मिश्रा और उनकी टीम द्वारा वार्डनों को निम्नलिखित विषयों पर प्रशिक्षित किया जा रहा है:
बालिका सुरक्षा और बाल संरक्षण: छात्राओं की सुरक्षा के कड़े मानकों का पालन.
नेतृत्व विकास और जीवन कौशल: वार्डनों को बेहतर लीडर और प्रबंधक बनाना.
मानसिक-सामाजिक सहयोग: छात्राओं को परामर्श और मानसिक सहयोग देना.
छात्रावास प्रबंधन: हॉस्टल के वातावरण को संवेदनशील और अनुशासित बनाना.
1 अप्रैल तक चलेगा प्रशिक्षण अभियान
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से विभिन्न बैचों में आयोजित किया जा रहा है:
प्रथम बैच: 9 मार्च से 13 मार्च 2026 (गाजियाबाद और अयोध्या).
आगामी बैच: 16-20 मार्च, 23-27 मार्च और अंतिम बैच 28 मार्च से 1 अप्रैल 2026 तक.
क्या है उद्देश्य?
शिक्षा विभाग के अनुसार, इस पहल का मकसद केवल प्रशासनिक सुधार नहीं है, बल्कि कस्तूरबा विद्यालयों को 'सुरक्षा और नेतृत्व विकास' के मॉडल केंद्रों के रूप में विकसित करना है. इससे बालिकाओं को ऐसा वातावरण मिलेगा जहां वे आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की आधारशिला रख सकेंगी.
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