कानपुर: करोड़ों खर्च कर स्कूलों में लगाईं घटिया फर्नीचर! टूटी बेंच में देखिए घपले की कहानी

कानपुर: करोड़ों खर्च कर स्कूलों में लगाईं घटिया फर्नीचर! टूटी बेंच में देखिए घपले की कहानी
फोटो: सूरज सिंह

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) सरकार आने के बाद से भ्रष्टाचार पर नकेल लगाने की हर कोशिश की गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) का सख्त आदेश है कि भ्रष्टाचार को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा था कि अगर कोई भी भ्रष्टाचार में दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त से सख़्त कार्रवाई की जाएगी. मगर लगता है कि यूपी में अभी अधिकारी सीएम योगी के इन बातों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं.

अहम बिंदु

दरअसल पूरा मामला कानपुर देहात के जिला बेसिक शिक्षा विभाग से सामने आया है. बता दें कि यहां सन 2017-18 में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वालों बच्चों को बेहतर शिक्षा मुहैया कराने के लिए शासन द्वारा जिले के सरकारी विद्यालयों में बच्चों के बैठने के लिए थ्री सीटर बेंच खरीदने के लिए करोड़ों रुपये का बजट दिया गया था. जिले के 207 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में चार हजार से अधिक थ्री सीटर बेंच की सप्लाई के लिए 1 करोड़ 79 लाख रुपए का टेंडर करवाया गया था.

स्कूलों में बेंच सप्लाई का टेंडर दिल्ली की एक फर्म रिम्स मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था, जिसके बाद से सभी स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए बेंच की सप्लाई की गई थी लेकिन बेंच सप्लाई में जो मानक तय किए गए थे उनके अनुसार बेंच की सप्लाई की गई. जब इन स्कूलों में बेंच की सप्लाई का टेंडर किया गया था उस समय संगीता सिंह यहां की बीएसए थी. उनके  ट्रांसफर के बाद कानपुर देहात में बीएसए के पद पर सुनील दत्त आए थे.

कई बार गठित हुई जांच टीम

गौरतलब है कि इन स्कूलों में मानक के अनुसार बेंच की सप्लाई ना होने पर कई बार जांच टीमों का गठित किया जा चुका है. जांच के दौरान बेंच की सप्लाई तय मानक के अनुसार नहीं पाए गए थे और जांच रिपोर्ट भी अधिकारियों को सौंपी गई थी.

लाखों रुपयो का पेमेंट करवाया

बता दें कि टेंडर के दौरान एक बेंच की कीमत 4195 रुपये थी. मानक के अनुसार स्पलाई ना होने से  जिले के अधिकारियों ने एक बेंच की कीमत में 984 रुपये 69 पैसे की कटौती कर दी. इसी के साथ सभी स्कूलों को रुपये में कटौती करते हुए 3210 रुपये 31 पैसे के हिसाब से एक बेंच का पेमेंट करने का आदेश दे दिया था, जबकि नियम के अनुसार बेंच की सप्लाई मानक या संख्या में कम होने पर जिस फर्म को अधिकारियों द्वारा ब्लैक लिस्टेड करना चाहिए था उस फर्म को लाखों रुपये का पेमेंट करवा दिया गया.

नई बीएसए ने भी जारी किया पेमेंट करने का आदेश

अधिकारियों द्वारा फर्म को पेमेंट करने के आदेश के बाद जिले के 207 स्कूलों में से 92 स्कूलों ने चेक के द्वारा फर्म को पेमेंट कर दिया, जिसमें से 8 स्कूलों का चेक किन्हीं कारणों से बाउंस भी हो गया. फिर जिले में रिद्धि पांडेय नई बीएसए अधिकारी बन कर आई.

जिन स्कूलों की तरफ से फर्म को पेमेंट नहीं किया गया था उन्होंने उन सभी स्कूलों को पेमेंट करने का आदेश फिर जारी कर दिया. गौर करने वाली बात यह भी है कि जांच रिपोर्ट में फर्म ने मानकों के अनुसार बेंच दी ही नहीं है लेकिन फिर भी अधिकारियों द्वारा कार्रवाई करने की जगह फर्म को पेमेंट करने का जोर दिया जा रहा है.

स्कूलों में गई नई बेंच की हालत खराब

सरकारी विद्यालयों में सप्लाई की गई बेंचो की हालत अभी से खराब होने लगी है. जिन थ्री सीटर बेंचो को सालों साल चलना चाहिए था वह 3 से 4 सालों में ही टूट गई हैं. पास से देखने पर पता चलता है कि ना अच्छी लकड़ी का इस्तेमाल किया है और ना ही अच्छी प्लाई बोर्ड का इस्तेमाल किया गया है.

अहम बिंदु

भोगनीपुर तहसील के मलासा ब्लॉक के लेवामऊ उच्च प्राथमिक विद्यालय में 35 बेंचे की सप्लाई की गई थी, लेकिन अब इनकी हालत खराब है. विद्यालय के सहायक अध्यापक देवेंद्र सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि स्कूल में 35 सेट बेंच के आए थे जिसमें से अब तक एक तिहाई तो टूट चुके हैं और जो है उनकी की भी हालत ठीक नहीं है.

अकबरपुर विकासखंड के बिवाइन संविलियन विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुनील कुमार कहते हैं कि, 2019 में उनके विद्यालय में भी 35 फर्नीचर की सप्लाई की गई थी लेकिन जब उन फर्नीचरों की तौल कराई गई तो वह मानक के अनुसार नहीं थे.

इस पूरे मामले पर बीएसए कानपुर (देहात) रिद्धि पांडेय, बेंच तय मानकों के अनुसार ना होने की बात मानती है. वह कहती है कि फर्म के अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया और पेमेंट करवाने की बात कही है.

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