Iqra Hasan Story: 'हर आदमी को कमजोर समझ रखा है आपने? क्या करोगे, गोली चला दोगे? ये गंदा पानी पीकर पीड़ित कहां जाएंगे? धकिया के मुझे ले जा रही थी... मैं अंधी हूं क्या?' ये तीखे और कड़े तेवर किसी फिल्मी सीन के नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी की बेहद शालीन मानी जाने वाली युवा सांसद इकरा हसन के हैं. अखिलेश यादव की इस 'तेजतर्रार' महिला सांसद ने थाने के बाहर धरना देकर पुलिस महकमे के पसीने छुड़ा दिए. संसद में अपनी पार्टी की तरफ से दहाड़ने वाली इकरा हसन पिछले 24 घंटे से सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. लोग उन्हें समाजवादी पार्टी की 'सिंघम सांसद' और 'आयरन लेडी' कहकर बुला रहे हैं. आइए जानते हैं कि आखिर वह क्या माजरा था जिसके आगे खाकी को घुटने टेकने पड़े.
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क्या है पूरा विवाद? क्यों थाने के बाहर डट गईं इकरा
पूरा मामला मोनू कश्यप नामक एक शख्स की हत्या से जुड़ा हुआ है. 21 तारीख को हुई इस हत्या के बाद इंसाफ की गुहार लेकर इकरा हसन पीड़ित मां के साथ डीआईजी ऑफिस पहुंची थीं. इकरा का आरोप है कि वहां पुलिस ने पीड़ित मां के साथ बदसलूकी की और विरोध करने पर इकरा के साथियों का गलत तरीके से 151 के तहत चालान कर उन्हें डिटेन कर लिया. यहां तक कि खुद इकरा हसन को भी काफी देर थाने में बैठाए रखा गया और उन्हें आगे जाने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग और रास्ते में ट्रक तक खड़े कर दिए.
इसी बात से नाराज होकर इकरा हसन एसपी/डीआईजी ऑफिस के बाहर ही धरने पर बैठ गईं. देखते ही देखते वहां समाजवादी पार्टी के नेताओं और समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा. करीब साढ़े तीन से चार घंटे तक चले इस 'हाई वोल्टेज ड्रामे' के दौरान इकरा अड़ गईं कि "या तो गलत तरीके से पकड़े गए समर्थकों को छोड़ो, या फिर मुझे भी जेल में डालो."
आखिरकार झुकी पुलिस
हंगामा बढ़ता देख और भारी भीड़ के दबाव में पुलिस के आला अधिकारियों को मौके पर आना पड़ा. आखिरकार मजिस्ट्रेट ने खुद धरना स्थल पर पहुंचकर इकरा को आश्वासन दिया, जिसके बाद देर रात यह धरना खत्म हुआ. इकरा ने पुलिस को अल्टीमेटम दिया था कि यदि सुबह 11:00 बजे तक उनके लोगों और पूर्व मंत्री समेत सभी 5 साथियों को रिहा नहीं किया गया, तो दोबारा 'हल्ला बोल' होगा. ताजा जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने वादे के मुताबिक सभी को रिहा कर दिया है.
'ब्यूटी विद ब्रेन' और सियासी विरासत का दमदार कॉम्बिनेशन
2024 के लोकसभा चुनाव में कैराना सीट से करीब 69,000 वोटों के भारी अंतर से बीजेपी के प्रदीप चौधरी को हराकर संसद पहुंचने वाली इकरा हसन की पहचान केवल एक जुझारू नेता की नहीं है. लोग उन्हें 'ब्यूटी विद ब्रेन' और 'तहजीब की मिसाल' भी कहते हैं. इकरा मुजफ्फरनगर के बेहद प्रभावशाली 'हसन परिवार' से आती हैं. उनके दादा, पिता (मुनव्वर हसन) और मां (तबस्सुम हसन) भी सांसद रह चुके हैं जबकि उनके बड़े भाई नाहिद हसन लगातार तीसरी बार विधायक हैं. 2019 में उनकी मां की हार का बदला इकरा ने 2024 में शानदार जीत दर्ज कर लिया.
इकरा की शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के क्वीन मैरी स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित 'लेडी श्रीराम कॉलेज' से इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और फिर लंदन जाकर लॉ (कानून) की डिग्री हासिल की. यही वजह है कि वह सदन में बेहद फर्राटेदार अंग्रेजी और तार्किक रूप से अपनी बात रखती हैं. हाल ही में उन्होंने सदन में ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के लिए 'भारत रत्न' की मांग उठाई थी.
विवादों से भी रहा नाता
एक तरफ जहां करणी सेना के एक कथित नेता (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ठाकुर योगेंद्र सिंह राणा) द्वारा इकरा को शादी का प्रपोजल देने वाले वीडियो पर जमकर बवाल मचा था और मुरादाबाद में एफआईआर दर्ज हुई थी. वहीं दूसरी तरफ, इकरा ने हिंदू समाज का दिल तब जीता जब एक शिव मंदिर को तोड़े जाने के विवाद के बीच वह खुद भारी विरोध के बावजूद वहां पहुंचीं. उन्होंने न सिर्फ लोगों से सीधा संवाद किया बल्कि मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक मदद देने का वादा भी किया जिसकी सोशल मीडिया पर खूब तारीफ हुई थी.
शालीन लेकिन हक के लिए अड़ जाने वाली नेता
इकरा को बेहद जहीन और शीरीं जुबान (मीठा बोलने वाली) माना जाता है. लेकिन जब बात जनता के हक की या फिर महिला सांसद के सम्मान की आती है, तो वह किसी से नहीं डरतीं. इससे पहले भी एक एसडीएम द्वारा महिला सांसद का अनादर करने पर उनके तीखे तेवर देखने को मिले थे.
आखिर क्यों शादी नहीं कर रहीं इकरा?
एक बेहद संपन्न और रसूखदार परिवार से आने वाली इकरा हसन से जब कई इंटरव्यूज में उनकी शादी को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने बहुत ही संजीदगी से जवाब दिया. इकरा का कहना है कि "फिलहाल मेरी जिंदगी में शादी के लिए स्पेस नहीं है. मेरी पहली प्राथमिकता मेरा काम और मेरे क्षेत्र की जनता की सेवा करना है. मैं अभी पूरी तरह से जनता के लिए डटकर काम करना चाहती हूं."
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