प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार: शोक में डूबे परिवार का सहारा बने आदित्य यादव, अंतिम विदाई से लेकर बेटियों की जिम्मेदारी तक निभाया भाई का फर्ज

Prateek Yadav Aditya Yadav News: प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार के बाद अस्थि विसर्जन में सहारा बने आदित्य यादव. भाई की बेटियों की जिम्मेदारी संभाली. जानिए शिवपाल यादव के बेटे आदित्य का राजनीतिक व पारिवारिक सफर.

यूपी तक

18 May 2026 (अपडेटेड: 18 May 2026, 10:02 AM)

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Prateek Yadav Aditya Yadav:समाजवादी पार्टी के गढ़ सैफई में इस समय माहौल बेहद गमगीन है. मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार हो गया है. दुख की इस बेहद कठिन घड़ी में शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव ने आगे बढ़कर परिवार का सहारा संभाला है. उन्होंने अपने भाई प्रतीक के अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन से जुड़ी सभी धार्मिक और पारिवारिक क्रियाओं को पूरी संवेदनशीलता के साथ पूरा किया.

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भतीजी पद्मजा का रखा खास ख्याल

अस्थि विसर्जन की बेहद भावुक कर देने वाली रस्मों के दौरान आदित्य यादव अपने भाई प्रतीक की छोटी बेटी पद्मजा का खास ख्याल रखते नजर आए. इस दुखद समय में जहां पूरा परिवार टूट चुका था, वहीं आदित्य ने सभी का मनोबल बनाए रखा. वे न केवल एक बड़े भाई के रूप में खड़े दिखे, बल्कि उन्होंने अपने छोटे भाई प्रतीक की बेटियों की पूरी देखभाल करने की जिम्मेदारी भी उठाई है, जो परिवार के प्रति उनके गहरे स्नेह को दर्शाती है.

मैहर राजघराने से है पारिवारिक संबंध

आदित्य यादव की निजी जिंदगी की बात करें तो उनका विवाह राजघराने में हुआ है. उनकी पत्नी राजलक्ष्मी सिंह मैहर स्टेट की राजकुमारी हैं, जिसके चलते उनके परिवार की पहचान और संपर्क समाज के संभ्रांत और खास वर्गों में है. हालांकि, अतीत में आदित्य अपनी निजी जिंदगी को लेकर कुछ विवादों में भी घिरे, लेकिन उन्होंने हमेशा खुलकर अपनी बात रखी और स्थितियों का परिपक्वता से सामना किया.

पारिवारिक संकट के बीच राजनीतिक सफर

आदित्य यादव हमेशा से ही पारिवारिक मामलों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आए हैं. अब वे पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ राजनीति में भी पूरी तरह सक्रिय हैं.

  • बदायूं से चुनावी मैदान में: आदित्य यादव समाजवादी पार्टी के टिकट पर बदायूं लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं.
  • छवि में परिपक्वता: चुनाव प्रचार के दौरान उनकी छवि और जनता के साथ सीधे संवाद को लेकर सियासी गलियारों में काफी चर्चा रही है. तमाम राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने एक परिपक्व राजनेता की तरह खुद को स्थापित किया है.

इस बेहद दुखद समय में जिस तरह से आदित्य यादव ने अपनी संवेदनशीलता और साहस का परिचय दिया है, उससे समाज और परिवार दोनों में उनके प्रति सम्मान और गहरा हो गया है.